रिपोर्ट-डॉ ए के दुबे


लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। करनाल (इंद्री) से अपनी बेटी की शादी में शामिल होने पहुंचे अशोक कुमार गुप्ता ने कन्यादान से पहले रक्तदान कर समाज के सामने मिसाल पेश की।
होटल अवध दयाल फार्म में आयोजित विवाह समारोह के दौरान उन्होंने स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन कराया। सबसे पहला रक्तदान स्वयं अशोक कुमार गुप्ता ने किया। यह उनका 61वां रक्तदान था।
अशोक गुप्ता ने कहा कि बेटी का कन्यादान उनके जीवन का यादगार क्षण है और इस अवसर को और अधिक सार्थक बनाने के लिए उन्होंने समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाते हुए रक्तदान किया। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी आकांक्षा का विवाह बहराइच निवासी रोहित से संपन्न हुआ।
उन्होंने कहा कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है और ऐसे शुभ अवसरों पर रक्तदान जैसे कार्य समाज में जागरूकता बढ़ाते हैं।
परिवार और अतिथियों ने भी किया रक्तदान
इस अवसर पर कई परिजनों और अतिथियों ने भी स्वैच्छिक रक्तदान किया। विश्व रिकॉर्डधारी डॉ. सुरेश कुमार सैनी (कैप्टन) भी उपस्थित रहे। उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता भगवत प्रसाद गुप्ता, अधिवक्ता अनिल गुप्ता, नेहा, ऋषभ, श्रुति तथा डॉ. प्राची गुप्ता सहित अन्य परिजनों ने रक्तदान किया।
रिशभ ने कहा कि बहन की शादी के अवसर पर पहला रक्तदान करना उनके लिए गर्व की बात है। श्रुति ने इसे अविस्मरणीय क्षण बताया, वहीं डॉ. प्राची ने कहा कि शादी और जन्मदिन जैसे अवसरों पर रक्तदान करना दोहरी खुशी देता है।
रक्तदाताओं का सम्मान
सभी रक्तदाताओं को कैप्टन डॉ. सैनी द्वारा मेडल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि शादी जैसे पारिवारिक आयोजनों में रक्तदान शिविर आयोजित करना समाज के लिए प्रेरणादायक पहल है।
इस शिविर में लाल मोती चैरिटेबल ब्लड सेंटर की टीम ने रक्त एकत्र किया। ब्लड सेंटर के डायरेक्टर अजित दुबे ने कहा कि अशोक गुप्ता की पहल से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और अधिक लोग रक्तदान के लिए प्रेरित होंगे।
समाज के लिए संदेश
अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि बेटी के कन्यादान से पहले रक्तदान करना उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विवाह, जन्मदिन और अन्य शुभ अवसरों पर रक्तदान शिविर आयोजित कर मानवता की सेवा करें।
यह पहल न केवल एक पिता के कर्तव्य का उदाहरण है, बल्कि समाज में सेवा और जागरूकता का सशक्त संदेश भी देती है।








