फतेहपुर। जिले में शहर से लेकर कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक संचालित मानक विहीन निजी नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथॉलॉजी लैब से होली के मौके पर कथित रूप से लाखों रुपये की वसूली किए जाने की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक करीब तीन लाख रुपये तक की वसूली का मामला सामने आ रहा है, जिसमें विभाग के एक लिपिक की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि यह वसूली विभागीय अफसरों की कथित मिलीभगत से की गई। आरोप है कि होली से पहले ही मानक विहीन अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड सेंटरों और पैथॉलॉजी लैबों को लेकर नोटिस भेजने की तैयारी की गई थी। इसी दौरान कई संचालकों से कार्रवाई से बचाने के नाम पर सेटिंग की बातचीत भी शुरू कर दी गई थी।
सूत्रों का कहना है कि विभाग में अफसर से लेकर लिपिक तक का एक पूरा नेटवर्क इस प्रक्रिया में सक्रिय रहा। पहले नोटिस भेजने की बात कही गई और बाद में कार्रवाई रोकने के नाम पर पैसों की मांग की गई। इसी को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि जोनिहा कस्बे के एक बंगाली डॉक्टर के मामले में विभाग की दाल नहीं गल सकी। बताया जा रहा है कि उक्त डॉक्टर का संबंध प्रदेश सरकार के एक मंत्री से करीबी बताया जा रहा है, जिसके चलते विभागीय दबाव वहां काम नहीं कर पाया।
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है और इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की भी किरकिरी हो रही है। विपक्षी दल इसे मुद्दा बनाकर सरकार और प्रशासन पर निशाना साध रहे हैं।
वहीं, जब इस मामले में संबंधित विभागीय अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने किसी भी प्रकार की वसूली के आरोपों से साफ इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि विभाग द्वारा केवल मानकों के अनुसार जांच और कार्रवाई की जाती है, किसी भी तरह की अवैध वसूली का सवाल ही नहीं उठता।
फिलहाल जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और निजी अस्पतालों से कथित वसूली को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह मामला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।।








