फतेहपुर- इस बार रविवार 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पावन पुण्य पर्व है। इसी तिथि को भगवती परांबा पार्वती का अवढर वरदानी भोलेनाथ शिव के साथ पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ और उनकी प्रथम संतान षडानन कुमार कार्तिकेय के द्वारा मात्र 6 वर्ष की अवस्था में उस समय के दुर्दांततम दैत्य तारकासुर का संहार संभव हुआ। इसी तिथि को उन आशुतोष ने परमानंद निमग्न हो प्रथम बार वह विराट नृत्य किया जिसकी तांडव संज्ञा है।
यह तिथि अखंड ब्रह्मचर्य का तेज लिए, पाखंड खंडिनी पताका संभाले, सर्वप्रथम स्वराज का बिगुल बजाने वाले, हिंदी भाषा के सबल समर्थक महर्षि दयानंद सरस्वती से संबद्ध होकर आर्य समाजियों के बीच ऋषि बोधोत्सव के नाम से भी प्रसिद्ध है। इसी तिथि को शिवलिंग के ऊपर चढ़ती- उतरती, नैवेद्य कुतरती छोटी सी चुहिया के कारण “न तस्य प्रतिमा अस्ति”(यजुर्वेद 32/3, अथर्ववेद 5/30/12 )का भाव उनके भीतर उपजा और उनकी आत्मा अचानक वास्तविक शिव के साक्षात्कार को मचल उठी तथा इस देश को एक अलौकिक क्रांतिकारी उद्भट संत प्राप्त हो गया जिसने समाज की तत्कालीन समस्त कुरीतियों पर पुरजोर प्रहार किया और आज भी जिनका ‘सत्यार्थ प्रकाश’ मानव – मन को मणि- दीपक के समान आलोकित कर रहा है।
“महादेव जैसा नहीं, कोई दूजा देव । जो औरों को दे अमृत, विष पी ले स्वयमेव ।।”
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“महादेव जैसा नहीं, कोई दूजा देव । जो औरों को दे अमृत, विष पी ले स्वयमेव ।।” 15 फरवरी 2026 : महाशिवरात्रिलेखक : शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी
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