फतेहपुर – शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 405 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 405 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के. पी. सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे । काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के. पी . सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- ज्ञान- देवि, मां सरस्वती , नमन करो स्वीकार। कविता में रस – छंद भर,स्वप्न करो साकार ।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- मिले सफलता यदि नहीं, फिर से करें प्रयत्न। अंतर्मन मंथन करें,पाएंगे शुभ रत्न ।। डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – पति पत्नी ही चक्र हैं, जीवन- रथ के दोय। दोउन के सहयोग बिन,जीवन दूभर होय।। प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – युगों – युगों से धरती पर,ज्ञानी -विज्ञानी जन्म लिए। वाल्मीकि सा हुआ न कोई, जिसका प्रभु गुणगान किये ।। डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – साधक अनहद नाद के ,गायक परम प्रवीण। छन्नू लाल जी हो गए, पंचतत्व में लीन।। काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक गीत के माध्यम से अपनी श्रृंगारिकता को कुछ इस प्रकार नए शब्द एवं स्वर दिए-जान ओ दिल तुम पर फिदा कर जाएंगे। लुट गए अब, किस कदर घर जाएंगे ।। तीर- तलवारें करेंगी क्या सनम, हम तुम्हारी चाह में मर जाएंगे।।
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मिले सफलता यदि नहीं, फिर से करें प्रयत्न। अंतर्मन मंथन करें,पाएंगे शुभ रत्न ।।
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