फतेहपुर। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 453 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां, वंदना ,मांग रहे वरदान ।
राष्ट्र प्रेम सब में भरो ,भारत बने महान।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- नशा नाश तन का करे, जीवन हो अभिशाप।
सारे कष्टों का जनक, इससे बड़ा न पाप ।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – आंखन की करि कोठरी, पुतली – सेज सजाय।
पलकन – परदा डारि कर,पिय का लेय मनाय।।
डॉ वेदनारायण वाजपेई ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- करते तेज प्रकाश, वेद भी महिमा गाते।
हल मूसल को धार ,धरा का भाग्य जगाते।।
कह कवि कुल अवतंस, आदि ऊर्जा के स्वामी ।
जय हलधर बलभद्र, नमन प्रभु अन्तर्यामी।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – गांव ,शहर वालो, सब सुन लो, सब रोगों की एक दवा।
नित्य सफाई करिए घर की, रोग सभी हो जाएं हवा।।
डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – कैसी विडंबना है देखो, जो जग -स्रष्टा कहलाता है।
सबके अंतस में स्थित है, पर कोई समझ न पाता है।
काव्य गोष्ठी के आयोजक तथा संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने एक मुक्तक के माध्यम से अपने भाव कुछ इस प्रकार व्यक्त किये- तिथि थी यही कि जब भारत ने,दिया पाक को कड़ा जवाब।
अपनी सेनाओं ने उसके, ध्वस्त कर दिए सारे ख्वाब ।। आगे पुनः पढ़ा – पास मोबाइल हर समय, हुईं किताबें दूर।
पुस्तक – संस्कृति लुप्त हो, होती चकनाचूर ।।
कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।







