फतेहपुर – लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के बाद जिले के एक पशुपालक परिवार पर ऐसा कहर टूटा, जिसने उनकी पूरी आजीविका छीन ली। राधानगर थाना क्षेत्र के मद्रियापुर गांव निवासी शिवरतन पाल और उनके पुत्र विजयपाल, अजय पाल व प्रदीप पाल की करीब 100 भेड़ों की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। भेड़ पालन ही परिवार की आय का एकमात्र साधन था, जो इस हादसे के बाद पूरी तरह चरमरा गया है।
पीड़ित परिवार के अनुसार, अक्टूबर माह में ठंड को देखते हुए वे अपनी लगभग 400 भेड़ों को चराने के लिए लखनऊ के आसपास ले गए थे। रोज की तरह आईआईएम रोड क्षेत्र में भेड़ों को चराया जा रहा था। इसी दौरान उसी क्षेत्र में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर पार्किंग व अन्य व्यवस्थाएं की गई थीं। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वहां पूरी-सब्जी सहित भारी मात्रा में खाना खुले में पड़ा रह गया, जिसे भेड़ों ने खा लिया। कुछ ही घंटों बाद रात में भेड़ों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और देखते ही देखते करीब 99 भेड़ों की मौत हो गई। आंकड़ों में उलझा नुकसान, मुआवजे पर सवाल हादसे की सूचना पर स्थानीय प्रधान के माध्यम से अधिकारियों को अवगत कराया गया, जिसके बाद पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उपचार शुरू किया। हालांकि तब तक भारी नुकसान हो चुका था। पीड़ितों का कहना है कि शुरुआत में उनके पास लगभग 400 भेड़ें थीं, जबकि प्रशासनिक रिकॉर्ड में 341 भेड़ें दर्शाई गईं। लखनऊ में 99 भेड़ों की मौत के बाद शेष 242 भेड़ों को नगर निगम लखनऊ की गाड़ियों से फतेहपुर भेजा गया, लेकिन रास्ते में ही 7 भेड़ों की और मौत हो गई, जिनमें 6 गर्भवती थीं।प्रशासन की ओर से मृत भेड़ों में से 87 भेड़ों का मुआवजा देते हुए प्रति भेड़ 10 हजार रुपये की दर से 8 लाख 75 हजार रुपये का चेक दिया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि यह मुआवजा बाजार भाव और वास्तविक नुकसान के मुकाबले बेहद कम है। उनका आरोप है कि कुछ मृत भेड़ों को घटनास्थल से हटाए जाने के कारण उन्हें मुआवजे में शामिल नहीं किया गया, जिससे उनका नुकसान और बढ़ गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार,
प्रशासन मौके पर मामले की गंभीरता को देखते हुए फतेहपुर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वेदव्रत गंगवार टीम के साथ मद्रियापुर गांव पहुंचे और शेष 235 भेड़ों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। उन्होंने बताया कि मृत भेड़ों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत जहरीला भोजन खाने से हुई या किसी संक्रामक बीमारी के कारण। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई और मुआवजे की प्रक्रिया की जाएगी।घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस के साथ तहसीलदार अमरेश सिंह, लेखपाल और कानूनगो भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। प्रशासन का कहना है कि पीड़ित परिवार को नियमानुसार सहायता दिलाई जाएगी।एक ओर जांच और औपचारिकताएं जारी हैं, तो दूसरी ओर भेड़ पालन पर निर्भर यह परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस परिवार को उनके नुकसान के अनुरूप न्याय मिल पाएगा या नहीं।






