2 अक्टूबर समस्त भारत देश के लिए ही नहीं पूरे विश्व के लिए उन दो महान हस्तियों के प्रति कृतज्ञतापूर्ण भावुक स्मरण लेकर आता है जिनका इस संसार में आगमन ईश्वर की विशेष सदिच्छा पूर्ति के लिए ही सुनिश्चित होता है। उनका जीवन ही मानवता के लिए एक संदेश बन जाता है। उनके महत्कर्म ही धर्म को व्याख्यायित किया करते हैं। वे स्वयं ही एक समूचे युग के निर्माता, उद्धारक और त्राता होते हैं। इसीलिए तो राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी ने महात्मा गांधी के लिए ‘युगावतार’ शब्द का प्रयोग किया। उन्होंने कहा- ” हे कोटि चरण, हे कोटि बाहु, हे कोटि रूप, हे कोटि नाम।
तुम एक मूर्ति ,प्रतिमूर्ति कोटि, हे कोटि मूर्ति ,तुमको प्रणाम।।
युग परिवर्तक, युग संस्थापक, युग संचालक ,हे युगाधार।
युग निर्माता ,युग मूर्ति तुम्हें ,युग -युग तक युग का नमस्कार।।
वह देश जो सम्माननीय जनों का सम्मान नहीं करता, राष्ट्र निर्माताओं के प्रति कृतज्ञ नहीं रहता, बहुत दिन चलने वाला नहीं।
दूसरे महान पुरुष के रूप में यह पर्व मां भारती के अमरलाल सादगी, सज्जनता, अपरिमेय साहस एवं ईमानदारी के पर्याय लाल बहादुर शास्त्री (2 अक्टूबर 1904—11 जनवरी 1966) जो मात्र 11 महीने प्रधानमंत्री के पद पर सुशोभित रहे और ताशकंद समझौते में मृत्यु का ससम्मान वरण करके अमरत्व को ग्रहण किये के भी जन्मदिन की याद दिलाता है। जिन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए भी उस जमाने में 5000 रुपए की कार लोन से खरीदी और उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी आदरणीया धर्मपत्नी ललिता शास्त्री जी ने उसकी किश्तें भरीं।
आज एक ग्राम प्रधान भी चुनाव जीतने के एक माह के अंदर करोड़ों का वाहन खरीदने में आश्चर्यजनक रूप से समर्थ हो जाता है! कितना बदलाव आ गया है तब से अब तक में!!
“गांधी जैसा, लाल बहादुर, जैसा कोई और नहीं।
मानवता के लिए रहा अब ,उन जैसा सिरमौर नहीं।।
बातें करना, वादे करना, भाषण देना बहुत सरल,
पर अपने दायित्व निभाने, का लगता वह दौर नहीं।।”
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2 अक्टूबर 2026 : दो महान महापुरुषों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का शुभ अवसर लेखक : शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी
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