विशेष संवाददाता – असोथर
फतेहपुर – बांदा बॉर्डर पर मौरंग खदान मरका खादर से अवैध मौरंग खनन और ओवरलोड परिवहन का खेल खुलेआम चल रहा है।
सूत्रों की मानें तो इस पूरे नेटवर्क के पीछे *एक दबंग पूर्व विधायक के गुर्गों का हाथ* है, जो सिंडीकेट बनाकर खदान से लेकर सड़क तक हर स्तर पर नियंत्रण बनाए हुए हैं।
सिंडीकेट नेटवर्क का दबदबा – शासन की गाइडलाइन धरी रह गई —
खनन नियम, परिवहन अनुमति, रॉयल्टी रवन्ना और सुरक्षा मानक — सबकुछ कागजों तक सीमित रह गया है।
मरका खादर की इस खदान से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक बिना नंबर, बिना रवन्ना और ओवरलोड मौरंग लेकर फतेहपुर जनपद के असोथर, थरियांव और विजयीपुर मार्ग से बेखौफ दौड़ रहे हैं।
*प्रशासनिक अधिकारियों की आंखों के सामने चल रहे इस खेल ने विभागीय मिलीभगत की पोल खोल दी है।
पूर्व विधायक के गुर्गों की ‘पैट्रोलिंग’ – डर सिर्फ जनता को
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि खदान से निकलने वाले वाहनों की निगरानी और सुरक्षा का जिम्मा पूर्व विधायक से जुड़े गुर्गों को सौंपा गया है, जो दिन-रात सड़कों पर एक्टिव रहते हैं ताकि कोई पत्रकार या स्थानीय शिकायतकर्ता कैमरा उठाने की हिम्मत न करे।
जो बोलेगा, वही पिसेगा — यही इस सिंडीकेट की नीति बन चुकी है।
सड़कें टूटी, डामर गायब, जनता परेशान
ओवरलोड डंपर और ट्रेलरों की निरंतर आवाजाही से *असोथर से बांदा जिले को जोड़ने वाले सरकंडी और कठौता मार्ग का बुरा हाल हो चुका है।
सड़क पर डामर और बजरी का नामोनिशान मिट गया है।
रात में धूल और कंपन से लोगों के घरों की दीवारें तक दरक रही हैं, लेकिन न तो PWD जाग रहा है, न ही खनन विभाग।
प्रशासन पर उठते सवाल – “क्या दबंगों के आगे सिस्टम नतमस्तक?”
जब हर रोज़ ओवरलोड ट्रक खुलेआम निकल रहे हैं, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि
*क्या प्रशासनिक चुप्पी दबाव में है या मिलीभगत में?*
अगर शासन की गाइडलाइनें लागू होतीं, तो आज सैकड़ों ट्रक बिना रवन्ना, बिना नंबर और बिना जांच के नहीं दौड़ते।
मरका खादर खदान से लेकर असोथर मार्ग तक की ताज़ा तस्वीरें और वायरल वीडियो खुद गवाही दे रही हैं
सिंडीकेट का दबदबा, प्रशासन की चुप्पी और जनता की बेबसी… सब कुछ साफ दिख रहा है।






