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आया मेला माघ का, आओ चलें प्रयाग। दरस- परस -मज्जन करें, पुण्य जायं सब जाग।।

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फतेहपुर- शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 418 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 418 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।

काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए  के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां, भगवती,जड़ता करो विनाश । सुमति करो मां ,कुमति को ,मन में भरो प्रकाश ।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए  काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया-  माघ मास है पुण्यप्रद, करें यज्ञ -तप- दान।
संगमतट पर वास कर, करें नित्य स्नान।।

डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया –  मानुष अति अज्ञानवश, आत्म स्वरूप न जान ।
चहुं दिस प्रभु ढूंढ़त फिरत, हृदय मांहि भगवान ।‌‌।

विनय कुमार दीक्षित  ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया –  नासमझ है, तू समझ ले, ठीक से अब गति समय की। 
है मिटा पाया न अब तक,   वासना अपने हृदय की ।।

प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में  कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत  किये – भारत के उपकार न भूलो , बंगलादेशी बनो सुजान।
सब धर्मों का मान बराबर, देता हर मजहब यह ज्ञान ।।

  राम अवतार गुप्ता ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – आया मेला माघ का, आओ चलें प्रयाग।
दरस- परस -मज्जन करें, पुण्य जायं सब जाग।।

  काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने एक  मुक्तक के माध्यम से इस भयानक सर्दी पर व्यंग्य कसते हुए अपने भाव कुछ इस प्रकार व्यक्त किये  –  लगता है इस साल सर्दी मार डालेगी ‌।
यारो ,महबूब की बेदर्दी मार डालेगी।।
खटिया खड़ी किए हैं ससुराल वाले सब,
मैं अकेला, उनकी धांधागर्दी मार डालेगी ।।

कार्यक्रम के अंत में  पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।

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