Homeउत्तर प्रदेशफतेहपुरइस बार कृषि बजट तो बढ़ाया गया है लेकिन ये देखना होगा...

इस बार कृषि बजट तो बढ़ाया गया है लेकिन ये देखना होगा कि कितना बड़ा है और वह कहां-कहां लगने वाला है। राकेश टिकैत ( राष्ट्रीय प्रवक्ता – बीकेयू )

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यूपी के मुजफ्फरनगर में बजट को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मुज़फ्फरनगर स्थित अपने निवास पर मीडिया से बात करते हुए कहा है कि इस बार कृषि बजट तो बढ़ाया गया है लेकिन ये देखना होगा कि कितना बड़ा है और वह कहां-कहां लगने वाला है।
उन्होंने कहा कि किसान सम्मन निधि की आशा थी की उसको बढ़ाया जाएगा लेकिन वह भी नहीं बढ़ाई गई है अगर इसको बढ़ा देते तो जो छोटा किसान है उसको भी लाभ मिल जाता है और दूसरा फसलों के दाम बढ़ाने चाहिए थे एमएसपी गारंटी कानून वह शक्ति से 2027 में लागू होता ग्रामीण सड़क अस्पताल एजुकेशन उसी से सब जुड़े हैं। दूध पर जरूर इन्होंने बात की है कि हम दूध का उत्पादन बढ़ाने का काम करेंगे पशु पर काम करेंगे पशु डॉक्टर पर काम करेंगे उस पर काम हो लेकिन नकली दूध को कैसे पकड़ेंगे कैसे उस पर कंट्रोल करें जब तक नकली दूध देश में बनता रहेगा ओर जो बाहर से दूध आता है उससे नुकसान हो रहा है उसकी भरपाई कैसे करेंगे एक बड़ा सवाल है हमारा जो फीड आता है खाने का राशन आता है उस पर सब्सिसाइज किया जाए।
राकेश टिकैत की माने तो देखो उम्मीद जो किसान सम्मान निधि है। उसमें भी चल रही थी। बात के यह उसको बढ़ा दें। जो छोटा किसान है। उसको भी लाभ मिल जाता है। और दूसरा है। फसलों के दाम फसलों के दाम बढ़ने चाहिए। एमएसपी गारंटी कानून वह सख्ती से  लागू होता। ग्रामीण सड़के, ग्रामीण अस्पताल और ग्रामीण एजुकेशन यह उसी से जुड़े हैं। सारे और रहे दूध पर जरूरी उन्होंने बात की हम दूध का उत्पादन बढ़ाने का काम करेंगे। पशु पर कम करेंगे। पशु डॉक्टर पर काम करेंगे। वह ठीक है। उस पर काम हो लेकिन नकली दूध को कैसे पकड़े कैसे उसको कंट्रोल करें। जब तक नकली दूध देश में बनता रहेगा। जो बाहर से ड्राइ फोम में दूध आता है। मिल्क आएगा तो उसकी जो नुकसान हो रहा है। उसकी भरपाई कैसे करेंगे। एक बड़ा सवाल है। हमारा है। और जो फीड आता है। खाने का राशन आता है। उसे पर सब्सिडीज कर जाए।
पैसे का तो इन्होंने किया। कृषि बजट बढ़ाया है। देखेंगे कितना बड़ा है। लेकिन वह लगेगा। कहां-कहां वह स्मॉल इंडस्ट्री को जाएगा। जो वेस्ट इंडस्ट्री हैं। जो फूड प्रोसेसिंग यूनिट है। उनको भी कृषि बजट से हीं पैसा जाता है। चाहे छोटा इंडस्ट्री गांव में हमारे किसान और नौजवान लगात हैं। छोटा उद्योग धंधे करने वाले लोग लगाते हैं। क्या उसको उनका बेनिफिट होता है।
छूट उसमें कुछ नहीं मिली वह तो 40 किलो का कट्टा कर दिया। उसमें कुछ छूट नहीं मिली। रेट ऐसे ही है।
नहीं बढ़ाई गई वह 6000 रुपये ही है उम्मीद थी कि 12000 करेंगे। महंगाई के हिसाब से उसको भी बनना चाहिए था।, नहीं बढा
मांग तो हम हर साल लिख कर देते हैं। यह तो हमारा हक है। उसकी डिमांड करते हैं। हम वह नहीं हुई। कुछ ज्यादा।
बीज कानून जो आएगा। तो शायद उसमें यह बात कर रहे हैं। होंगे लेकिन हम उसका भी विरोध कर रहे हैं। क्योंकि उसमें कंपनी राज ज्यादा आएगा। नकली बीज  आ रहा है। उस पर कोई वह नहीं है। सरकारों का मॉनिटरिंग नहीं है। किसान की फसल खराब हो रही है। किसान के खेत खराब हो रहे हैं। तो उसमें ज्यादा नुकसान किसानों की भरपाई नहीं हो रही है।जो फसल बीमा योजना है बहुत किसान की फसल पानी में तबाह हो जाती है। अभी हमने देखा चार दिन पहले सिरसा में थे। दिल्ली का पानी जो केमिकल युक्त पानी है। इंडस्ट्री का वह बाया झज्जर गुड़गांव एक घाघर दरिया है। उसमें मिलता है। पूरी फसलों में वहां पर पानी आता है। उससे बहुत नुकसान हो रहा है। आज भी वहां पर जल भराव की समस्या है।
देखो किसान तो अपने आंदोलन पर ही है। हम अपनी बात कहते रहते हैं।
वह तो कहेंगे ही भाई वह तो बहुत बढ़िया-बढ़िया बात बताएंगे। युवा के लिए उन्होंने क्या किया। खेल के स्टेडियम बनने चाहिए गांव-गांव हरियाणा एक स्टेट है। वहां पर स्टेट स्टेडियम बना रखे है। उन्होंने लेकिन और जगह इस तरह की सुविधा नहीं है। स्टेट गवर्नमेंट ने ज्यादा काम किया।

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