फतेहपुर-शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 423 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 423 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन शिव सागर साहू की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए शिव सागर साहू ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- हे शारदे, अज्ञान हरकर ,ज्ञान जग को दीजिए ।
सद्भाव की गंगा बहा ,नफरत- घृणा हर लीजिए ।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- भारत में निर्मित हुई, चीजें करें प्रयोग।
आत्म निर्भरता बढ़े, राष्ट्रोन्नति का योग ।।।
के पी सिंह कछवाह ने पढ़ा- बढ़ता जाता देश में खतरनाक आतंक।
मिलकर करिए खात्मा, रहें सभी निश्शंक ।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – संसार विषमता से पीड़ित, हो रहा अहर्निश निर्निमेष।
अन्यायी -अत्याचारी जन,धर रहे रात-दिन विषम वेश ।।
हिमांशु कुमार जैसल ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- दूल्हन ने इंतजार में चूड़ी नहीं लिया,
वे कह गए थे लौटके कंगन दिलाएंगे ।
घर भूलकरके सरहद को ही घर बना लिया,
कहकर गए थे लौटके हम जल्दी आएंगे ।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – मटर मटकती ,सरसों हंसती ,अरहर झांझ बजाती है ।
चना पोढा़य, आम बौराए ,जब वसंत ऋतु आती है।।
राम आवातर गुप्ता ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – मलेशिया की विजिट में पहुंचे हिंद- प्रधान । समझौतों से देश का, और बढ़ेगा मान ।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक मुक्तक के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किये – करुणा की अविरल वृष्टि बनो, ममता की कोमल दृष्टि बनो ।
मेरे भारत के कर्णधार , तुम नव विधान ,नव सृष्टि बनो ।।
कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।








