फतेहपुर शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 433वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता के.पी. सिंह कछवाह ने की, जबकि संचालन शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष के.पी. सिंह कछवाह ने वाणी वंदना से किया। उन्होंने मां सरस्वती का आह्वान करते हुए कहा—
“सरस्वती मां, आइए, कविजन करें पुकार,
अक्षय पावन तीज में, करो नमन स्वीकार।”
इसके बाद उन्होंने भगवान परशुराम को नमन करते हुए अपने भाव प्रस्तुत किए—
“परशुराम जी को नमन, हाथ जोड़ सौ बार,
जो ईश्वर के रूप हैं, पौरुष-सिंधु अपार।”
डॉ. सत्य नारायण मिश्र ने छंद के माध्यम से समाज में बढ़ते अन्याय पर प्रहार करते हुए कहा—
“अन्यायी वा अत्याचारी, बहुत अधिक बढ़ रहे निरंतर,
अपने प्रबल पराक्रम द्वारा, नाश करो इनका हे भृगुवर।”
राम अवतार गुप्ता ने मुक्तक में परशुराम जन्मोत्सव की महत्ता को दर्शाया—
“परशुराम का जन्मदिन, मना रहा संसार,
जो श्रीहरि के अंश हैं, और छठे अवतार।”
प्रदीप कुमार गौड़ ने भगवान परशुराम के व्यक्तित्व का वर्णन करते हुए कहा—
“महाबली जमदग्निपुत्र हैं, सदा विश्व हित में अनुरक्त,
अवतारी श्री परशुराम जी, परम प्रसिद्ध महाशिवभक्त।”
डॉ. शिव सागर साहू ने अपने काव्य में जयघोष किया—
“जयति, जयति, जय बोलिए, कहिए जय भृगुराम,
परशुराम भगवान हैं, परशु सहित बड़नाम।”
कार्यक्रम के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने मुक्तक के माध्यम से प्रेरणादायक संदेश दिया—
“‘परशुरामजी की जय-जय’ कह, निज दायित्व संभालो,
सत्य, न्याय, तप, त्याग, पराक्रम में जीवन-पथ ढालो।”
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि पुजारी विजय कुमार शुक्ल ने सभी प्रतिभागियों को आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजन के समापन पर आयोजक द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।
काव्य गोष्ठी में साहित्य, संस्कृति और धार्मिक भावनाओं का सुंदर संगम देखने को मिला, जहां कवियों ने अपने शब्दों के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश दिया।






