फतेहपुर जिले के सिंचाई खंड निचली गंगा नहर विभाग में मृतक आश्रित कोटे से हुई नियुक्तियों और बाद में दिए गए प्रमोशन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शासन को भेजी गई गोपनीय शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियमों के विरुद्ध लिपिक संवर्ग में पदोन्नत किया गया। शिकायत में कहा गया है कि जिन कर्मचारियों को कंप्यूटर टाइपिंग तक ठीक से नहीं आती, उन्हें कथित सेटिंग और अनियमितताओं के जरिए टंकण परीक्षा में पास दिखाकर बाबू बना दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक एलजीसी और सिंचाई खंड में मृतक आश्रित कोटे से नियुक्त करीब 10 कर्मचारियों को बाद में लिपिक पद पर प्रमोट किया गया। आरोप है कि आईटीआई में आयोजित टंकण परीक्षा में कई कर्मचारी फेल हो गए थे, लेकिन बाद में लेनदेन के जरिए उन्हें प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। चर्चा है कि प्रति कर्मचारी लाखों रुपये लेकर परीक्षा पास कराई गई।
मामले के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि सभी कर्मचारियों की दोबारा टंकण और कंप्यूटर परीक्षा प्रयागराज, लखनऊ या कानपुर की स्वतंत्र समिति से कराई जाए। सूत्र बताते हैं कि कानपुर मंडल में इसी तरह के मामलों में कुछ कर्मचारियों को दोबारा परीक्षा में फेल होने पर मूल पद पर वापस भेजा जा चुका है।
बताया जा रहा है कि इस मामले की शिकायत शासन और जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी है। जांच आगे बढ़ने पर कई कर्मचारियों की पदोन्नति रद्द होने, वेतन रिकवरी और चतुर्थ श्रेणी पद पर वापसी जैसी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।






