यूपी फतेहपुर में मंदिर-मकबरे विवाद में जमीन को लेकर अब पेंच फस गया है, मांगी मकबरे के नाम जहां गाटा संख्या 753 में 1.7650 हेक्टेयर यानी लगभग 11 बीघा जमीन दर्ज है, वही वक्फ बोर्ड के पास महज 15 विस्वा जमीन है, ऐसे में अब मांगी मकबरा को लेकर जो दावे किए जा रहे थे कि उसमें 11 से 12 बीघा जमीन है, उसे लेकर शासन की रिपोर्ट पर अब लोगों की निगाहें टिक गई है। फतेहपुर जिले में वर्षों से चल रहा मठ-मंदिर संरक्षण विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। अदालत ने इस मामले में 30 अगस्त को सुनवाई तय की है। माना जा रहा है कि यह तारीख विवाद के भविष्य को दिशा दे सकती है, दरअसल, यह विवाद 1970 में शुरू हुआ था, जब मठ-मंदिर की संपत्ति और अधिकार को लेकर मुकदमा दायर किया गया, बाद में ये मामला कई अदालतों से होकर गुजरा, सन् 2012 में जिला जज के फैसले को चुनौती दी गई, वहीं मामले में वक्फ बोर्ड ने दावा किया है कि उसके पास 15बिस्वा जमीन मकबरे से संबंधित दर्ज है, बता दें कि मुस्लिम पक्ष के पैरोकार मोहम्मद आसिफ ने बताया कि 04.02.1989 में वक्फ बोर्ड ने सर्वे कराया था जिसके बाद ये संपत्ति दर्ज हुई थी, इसमें मकबरें का उनका ही एरिया लिया गया है जिसमें वो बना है, और वो करीब, 15बिस्वा के आसपास है, वही उन्होंने बताया सन्, 1906 में तत्कालीन डीएम एच आर नेविल ने फतेहपुर गजेटेरियन जारी किया, जिसके पेज नंबर 199 में इस मकबरे का जिक्र भी किया गया है, मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि सन् 1704 में बनाया गया से मकबरा मुकाल कालीन के समय का है, जिसके भीतर अब्दुल समद और उनके बेटे अबू मोहम्मद साहब की कब्रे आज भी मौजूद है, वहीं हिंदू पक्ष की माने तो यह मकबरा जहां पर बनाया गया है वहां ठाकुर जी(कृष्ण जी का और शिव मंदिर) है, जो इसकी बनावट से प्रतीत भी होता है, वक्फ बोर्ड और मांगी मकबरे जो कमेटी जो दावा कर रही है वो सरासर गलत है, मकबरा यहां पर कहीं रहा ही नहीं है,मकबरा कहीं और मौजूद था ,और जबरदस्ती मंदिर को तोड़कर मकबरे का निर्माण किया गया था,जिसे लेकर अब दोनों पक्षों के तर्क आमने-सामने हैं, वहीं शासन की रिपोर्ट के आधार पर ही अब इस मामले का हल निकलता दिख रहा है
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मंदिर-मकबरे विवाद में जमीन को लेकर फंस गया पेंच, वक्फ में दर्ज है महज 15 बिस्वा, जबकि मंगी मकबरे की खतौनी में दर्ज है लगभग 11 बीघा जमीन







