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Akhilesh Yadav Lohia Trust: सपा की विरासत पर अखिलेश यादव की पकड़ और मजबूत, शिवपाल के बाद अब लोहिया ट्रस्ट की कमान भी हाथ में

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Akhilesh Yadav Lohia Trust: समाजवादी पार्टी की सियासत में एक और बड़ा बदलाव हुआ है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अब लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष बन गए हैं। पिछले करीब एक दशक से इस ट्रस्ट की जिम्मेदारी उनके चाचा और सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव संभाल रहे थे। अब ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव के हाथ में आने के बाद सपा की राजनीतिक और वैचारिक विरासत से जुड़े अहम संस्थानों पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई है।

शिवपाल यादव की जगह अखिलेश को मिली जिम्मेदारी

लोहिया ट्रस्ट की हाल में हुई बैठक में अध्यक्ष पद को लेकर फैसला लिया गया। बैठक में मौजूद ट्रस्ट के सभी आठ सदस्यों ने अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाने पर सहमति जताई। इनमें शिवपाल सिंह यादव भी शामिल थे। बताया जा रहा है कि अब अखिलेश यादव पार्टी संगठन के साथ-साथ उससे जुड़े प्रमुख ट्रस्टों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की कमान भी अपने हाथ में ले चुके हैं। ऐसे में लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनना उनके लिए सिर्फ एक पद का बदलाव नहीं, बल्कि सपा की वैचारिक विरासत पर उनकी बढ़ती पकड़ के तौर पर देखा जा रहा है।

2017 के विवाद में शिवपाल को मिली थी कमान

लोहिया ट्रस्ट में मौजूदा बदलाव को समझने के लिए 2017 की सपा की पारिवारिक कलह को याद करना जरूरी है। उस दौर में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। परिवार के भीतर अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव के बीच भी टकराव देखने को मिला था। इसी राजनीतिक उठापटक के दौरान मुलायम सिंह यादव ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव को ट्रस्ट की जिम्मेदारी से हटाकर शिवपाल यादव को इसकी कमान सौंपी थी। इसके बाद से शिवपाल यादव लगातार ट्रस्ट के अध्यक्ष बने हुए थे। अब करीब 10 साल बाद इसकी कमान फिर से अखिलेश यादव के पास पहुंच गई है।

सपा की विरासत में क्यों अहम है लोहिया ट्रस्ट?

लोहिया ट्रस्ट समाजवादी विचारधारा से जुड़े प्रमुख संस्थानों में माना जाता है। इसका गठन समाजवादी पार्टी के अस्तित्व में आने से पहले ही हुआ था। ट्रस्ट के जरिए समाजवादी विचारधारा और डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों के प्रचार-प्रसार से जुड़े काम किए जाते रहे हैं। पार्टी से जुड़े लोगों के बीच भी इसका खास महत्व रहा है। यही वजह है कि लोहिया ट्रस्ट की अध्यक्षता में बदलाव को महज संगठनात्मक फैसला नहीं माना जा रहा। अखिलेश यादव के हाथ में ट्रस्ट की कमान आने का मतलब सपा की वैचारिक विरासत से जुड़े एक और अहम संस्थान पर उनकी सीधी पकड़ बनना है।

पार्टी के बाद ट्रस्टों पर भी अखिलेश की पकड़

अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा अब उस दौर से काफी आगे निकल चुकी है, जब पार्टी की कमान और परिवार से जुड़े अलग-अलग संस्थानों को लेकर अलग-अलग शक्ति केंद्र दिखाई देते थे। लोहिया ट्रस्ट में हुए ताजा बदलाव के बाद पार्टी प्रमुख की भूमिका और मजबूत होती दिख रही है। हालांकि इस फैसले में शिवपाल यादव की सहमति भी महत्वपूर्ण है। 2017 के पारिवारिक विवाद के बाद जिस ट्रस्ट की जिम्मेदारी उन्हें मिली थी, उसी की कमान अब अखिलेश यादव को सौंपे जाने पर उन्होंने भी सहमति दी है। इस बदलाव के बाद यूपी के सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि अखिलेश यादव ने सपा की राजनीतिक कमान के साथ-साथ पार्टी की वैचारिक और संस्थागत विरासत को भी अपने नेतृत्व के दायरे में ला दिया है।

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