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Ayodhya Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर दान विवाद में संतोष दुबे की प्रेसवार्ता रुकी, प्रशासनिक अनुमति पर फंसा पेंच

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श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शनिवार को उस समय नया घटनाक्रम सामने आया, जब धर्म सेना के प्रमुख संतोष दुबे की प्रस्तावित प्रेसवार्ता आयोजित नहीं हो सकी। जानकारी के अनुसार, जिस होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जानी थी, वहां के प्रबंधन ने प्रशासन की अनुमति के बिना कार्यक्रम कराने से इनकार कर दिया। होटल संचालक ने आयोजकों से स्पष्ट कहा कि प्रशासन से आवश्यक अनुमति पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद ही सभागार उपलब्ध कराया जाएगा।

इस घटनाक्रम के बाद निर्धारित समय पर होने वाली प्रेस वार्ता स्थगित हो गई और मौके पर मौजूद मीडिया प्रतिनिधियों को भी बिना किसी औपचारिक बयान के लौटना पड़ा। पूरे घटनाक्रम को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं शुरू हो गईं, हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।

अनुमति पत्र की मांग के बाद बदली स्थिति

सूत्रों के अनुसार, धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले को लेकर मीडिया के सामने अपना पक्ष रखने वाले थे। इसके लिए शहर के एक होटल में प्रेसवार्ता आयोजित की गई थी। पत्रकारों के पहुंचने के बाद होटल प्रबंधन ने आयोजकों से प्रशासन की अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे।

राम मंदिर दान गबन के कथित मामले में नई हलचल

बताया गया कि होटल संचालक ने स्पष्ट किया कि प्रशासन के निर्देशों के अनुसार किसी भी संवेदनशील विषय पर आयोजित होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रम अथवा प्रेसवार्ता के लिए आवश्यक अनुमति होना जरूरी है। अनुमति पत्र उपलब्ध न होने के कारण होटल प्रबंधन ने सभागार उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया और कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ सका।

संवेदनशील मुद्दे को देखते हुए बरती गई सतर्कता

राम मंदिर से जुड़े किसी भी विषय को प्रशासन अत्यंत संवेदनशील मानता है। ऐसे मामलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है। माना जा रहा है कि इसी कारण होटल प्रबंधन ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए बिना अनुमति के प्रेस वार्ता आयोजित नहीं होने दी। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रही कि आयोजकों को पहले प्रशासन से औपचारिक अनुमति लेने और उसके बाद ही कार्यक्रम आयोजित करने की सलाह दी गई। हालांकि इस संबंध में प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।

दान गबन के कथित मामले को लेकर बढ़ी हलचल

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि के कथित गबन का मामला पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में है। इस मामले में जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई कर रही हैं और विभिन्न स्तरों पर जांच आगे बढ़ रही है। इसी बीच कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी मामले में पारदर्शिता की मांग उठाई है।

धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे की प्रेसवार्ता पर लगी रोक

धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे भी इसी विषय पर मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखना चाहते थे। माना जा रहा था कि वे जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और अन्य पहलुओं पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे, लेकिन प्रेसवार्ता आयोजित नहीं हो पाने के कारण उनका पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ सका।

मीडिया प्रतिनिधियों को करना पड़ा इंतजार

निर्धारित समय पर बड़ी संख्या में पत्रकार होटल परिसर में पहुंच गए थे। सभी को संतोष दुबे के बयान का इंतजार था, लेकिन अनुमति संबंधी औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण कार्यक्रम शुरू ही नहीं हो पाया। कुछ समय तक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया गया, लेकिन अंततः प्रेसवार्ता स्थगित कर दी गई। मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि भविष्य में प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद नई तारीख तय कर प्रेसवार्ता आयोजित की जा सकती है। हालांकि आयोजन समिति की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।

कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता

अयोध्या देश का अत्यंत संवेदनशील धार्मिक नगर है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन किसी भी ऐसे आयोजन को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतता है, जिससे कानून-व्यवस्था या सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए निर्धारित नियमों का पालन सभी आयोजकों को करना चाहिए। अनुमति की प्रक्रिया का उद्देश्य किसी की अभिव्यक्ति पर रोक लगाना नहीं, बल्कि सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना है। इसी कारण समय-समय पर आयोजकों से आवश्यक अनुमति लेने को कहा जाता है।

आगे की रणनीति पर नजर

प्रेसवार्ता रद्द होने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे आगे कब और किस मंच से अपनी बात रखते हैं। यदि प्रशासनिक अनुमति प्राप्त हो जाती है, तो निकट भविष्य में दोबारा प्रेस वार्ता आयोजित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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