रिपोर्ट-अभिषेक दीक्षित
यूपी के बाराबंकी जिले में सोमवार को कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको चौंका दिया। रामनगर पीजी कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में जैसे ही समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण पहुंचे माहौल आम नहीं रहा। कार्यक्रम के बाद मंत्री जब कॉलेज परिसर स्थित समाज कल्याण विभाग के छात्रावास का निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगीं।
जैसे ही मंत्री ने पांच लाख रुपये के रख-रखाव और रंग-रोगन कार्य का जायजा लिया उन्हें गड़बड़ियां नजर आईं। मंत्री ने मौके पर ही खर्च का हिसाब-किताब मांगा लेकिन मौजूद अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जब अधिकारी केवल बिजली के तार और मामूली पुताई दिखाकर बात टालने लगे तो मंत्री का पारा चढ़ गया।
इसके बाद जो हुआ उसने सबको चौंका दिया। कैमरे ऑन थे वीडियो रिकॉर्डिंग चल रही थी और मंत्री ने वहीं मौके पर ही ‘नायक स्टाइल’ में ऐलान कर दिया कि समाज कल्याण अधिकारी और छात्रावास अधीक्षक तत्काल प्रभाव से निलंबित!
यह कोई दिखावटी बयान नहीं था पूरी कार्रवाई कैमरे में रिकॉर्ड हुई। मंत्री असीम अरुण ने मामले को लेकर रविवार शाम ही अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार। आज बाराबंकी स्थित रामनगर पी.जी. कॉलेज में संचालित छात्रावास का निरीक्षण कर पाया कि मरम्मत हेतु आवंटित 5 लाख के सापेक्ष कार्य बेहद कम हुआ है। इसमें संलिप्त जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रीमती सुषमा वर्मा एवं छात्रावास अधीक्षक श्री संतोष कुमार कनौजिया को निलंबित किया गया है। उप निदेशक समाज कल्याण, अयोध्या मंडल एवं अधिशासी अभियंता, यूपीसीडीको को गहन जांच कर आज शाम तक प्रारंभिक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री ने यह भी साफ किया कि छात्रावासों के लिए आगामी दिनों में 10 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि दी जाएगी, लेकिन पिछली दी गई राशि का हिसाब लिया जाएगा और जो गड़बड़ी हुई है उसकी वसूली भी तय मानी जाए। फिलहाल जांच की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग अयोध्या के डिप्टी डायरेक्टर को सौंपी गई है। बाराबंकी की जनता मंत्री की इस कड़क कार्रवाई को ‘रियल लाइफ नायक’ की संज्ञा दे रही है।







