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EXCLUSIVE: फतेहपुर ‘बाबू सुसाइड कांड’—लिपिक विनोद की हालत फिर बिगड़ी, लखनऊ में भर्ती; FIR न होने से परिजन आहत

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फतेहपुर। जिले के चर्चित DIOS ‘बाबू सुसाइड कांड’ में नया मोड़ सामने आया है। पीड़ित वरिष्ठ लिपिक विनोद श्रीवास्तव की हालत एक बार फिर अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए लखनऊ के KGMU में भर्ती कराए हैं। जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। शुक्रवार देर शाम उनके बेटे ने सोशल मीडिया पर तस्वीर और स्वास्थ्य अपडेट साझा कर ईश्वर से जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

 आत्महत्या प्रयास से मचा था हड़कंप

कुछ दिन पहले DIOS कार्यालय में तैनात लिपिक विनोद श्रीवास्तव ने कथित रूप से नींद और ब्लड प्रेशर की दवाएं खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। हालत बिगड़ने पर सहकर्मियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया। घटना की सूचना मिलते ही अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, जिसके बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया।

 पत्नी की तहरीर, लेकिन FIR अब तक नहीं

मामले ने तूल तब पकड़ा जब उनकी पत्नी पूनम श्रीवास्तव ने सदर कोतवाली में तहरीर देकर पति को मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया। तहरीर में DIOS और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं हुई है।
परिजनों का कहना है कि न्याय न मिलने से परिवार गहरे आहत है, जिसका असर सीधे विनोद की सेहत पर पड़ रहा है।

 25 लाख लेन-देन का आरोप, वायरल ऑडियो-वीडियो

विनोद श्रीवास्तव के बेटे शिवांग ने सोशल मीडिया पर कुछ ऑडियो और वीडियो क्लिप साझा कर सनसनी फैला दी। इन क्लिप्स में नौकरी/पद दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपये की मांग और लेन-देन का दावा किया गया है। हालांकि इन सामग्रियों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 आरोपों पर सियासत गरम

आरोपों में घिरे पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वहीं भाजपा संगठन में भी इस पूरे मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है और रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेजी जा चुकी है।

 जांच समिति बनी, रिपोर्ट का इंतजार

जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। SDM की अध्यक्षता वाली इस समिति को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हो सकी है।

 अब सबसे बड़ा सवाल—न्याय कब?

फिलहाल मामला तहरीर, आरोप-प्रत्यारोप और वायरल साक्ष्यों के बीच उलझा हुआ है।
परिजनों का कहना है कि FIR दर्ज न होना ही सबसे बड़ी पीड़ा है, जिससे पीड़ित परिवार मानसिक रूप से टूटता जा रहा है।

फतेहपुर का यह ‘बाबू कांड’ अब सिर्फ आत्महत्या प्रयास का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम और सियासत की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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