उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से तेज हो चुकी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव जहां एक तरफ अपने चर्चित ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी अब सवर्ण और खासकर ब्राह्मण वोट बैंक में भी पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी मिशन के तहत सपा सांसद सनातन पांडेय को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा था पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र तो सिर्फ झांकी हैं। सबसे बड़ा खेल तो यूपी में होगा। राजभर का कहना है कि सपा के सांसद टूटने को तैयार हैं और यह होकर रहेगा। राजभर ने इशारा किया था कि बागी सांसदों का नेतृत्व बलिया का लाल करेगा। लेकिन, अब वही सनातन पांडेय सपा की नई सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए हैं। अखिलेश यादव ने उन्हें ब्राह्मण समाज के बीच पार्टी का संदेश पहुंचाने और हिंदुत्व के मुद्दों पर भाजपा को चुनौती देने की जिम्मेदारी सौंपी है।
ब्राह्मण सम्मेलन के जरिए नई जमीन तलाश रही सपा
बलिया से सांसद सनातन पांडेय इन दिनों प्रदेश के कई जिलों में ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं। वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और पूर्वांचल के कई इलाकों में उनके कार्यक्रम लगातार हो रहे हैं। इन आयोजनों के जरिए सपा ब्राह्मण समाज को यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि पार्टी केवल पिछड़ों और अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहती है।
सनातन पांडेय की पहचान एक बेबाक और आक्रामक नेता के रूप में रही है। पूर्वांचल की राजनीति में उनकी पकड़ और ब्राह्मण समाज में प्रभाव को देखते हुए सपा नेतृत्व उन्हें आगे बढ़ा रहा है।
पवन पांडेय के साथ मिलकर साध रहे ‘सनातन’ समीकरण
अयोध्या के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय भी इस रणनीति का अहम हिस्सा हैं। राम मंदिर चढ़ावा और चंदा विवाद के मुद्दे को उठाकर उन्होंने भाजपा और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को घेरा है। वहीं सनातन पांडेय ब्राह्मण सम्मेलनों के जरिए संगठनात्मक मोर्चे पर सक्रिय हैं।
सपा की कोशिश है कि एक तरफ भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाया जाए, तो दूसरी तरफ धार्मिक और सामाजिक विमर्श में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जाए। इससे भाजपा के उस आरोप को कमजोर करने की कोशिश हो रही है जिसमें सपा को ‘हिंदू विरोधी’ बताया जाता है।
PDA से आगे बढ़कर ‘सर्वसमाज’ की रणनीति
2024 लोकसभा चुनाव में पीडीए फॉर्मूले ने सपा को बड़ी सफलता दिलाई थी। अब 2027 के लिए अखिलेश यादव उस सामाजिक गठजोड़ में सवर्णों, खासकर ब्राह्मणों को जोड़ना चाहते हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सनातन पांडेय और पवन पांडेय को आगे कर सपा ‘पीडीए प्लस’ की रणनीति पर काम कर रही है।
यानी पार्टी केवल जातीय समीकरणों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि खुद को ‘सर्वसमाज’ की पार्टी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सनातन पांडेय का बढ़ता राजनीतिक कद और उन्हें मिली नई जिम्मेदारी 2027 के चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभा सकती है।






