फ़तेहपुर में आशा और आशा संगिनी कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा और मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
आशा कार्यकर्ताओं ने मांग की कि उन्हें 18 हजार रुपये और आशा संगिनी को 24 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। उनका कहना है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं, लेकिन आज भी उन्हें नियमित वेतन और पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि जब तक नियमित वेतन व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक मिलने वाले इंसेंटिव को दोगुना किया जाए।
ज्ञापन में ईपीएफ, ईएसआई और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं लागू करने, आशा संगिनी को सुपरवाइजर का दर्जा देने, कार्य के लिए 5जी मोबाइल या टैबलेट उपलब्ध कराने तथा इलेक्ट्रिक स्कूटी या यात्रा भत्ता देने की मांग भी शामिल है।
इसके अलावा आशा कर्मियों ने 10 लाख रुपये का जीवन बीमा, दुर्घटना की स्थिति में उचित मुआवजा, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की सहायता राशि, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ और परिवार सहित आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की। साथ ही प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना में अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने की मांग भी रखी गई।
आशा और आशा संगिनी कर्मियों का कहना है कि कोरोना काल से लेकर आज तक उन्होंने हर परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभाई हैं। ऐसे में सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और उन्हें सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराए। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इन मांगों पर क्या फैसला लेती है।
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आशा-आशा संगिनी की बड़ी मांग, 18-24 हजार वेतन और सामाजिक सुरक्षा की उठी आवाज
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