इस बार 1 फरवरी 2026 को माघ स्नान का महत्वपूर्ण पूर्णिमा पर्व है और इसी दिन महात्मा रविदास जी का जन्मदिन भी है साथ ही रविवार का भी अद्भुत संयोग है । इनकी श्रद्धापरक कथाओं में “मन चंगा तो कठौती में गंगा” से लेकर जाने कितनी लोकोक्तियां और जनश्रुतियां समाज के बीच प्रसिद्ध हैं।
इनका जन्म सन 1377 में गोवर्धन पुरा वाराणसी में पिता संतोष दास एवं माता कलसा देवी के घर में चर्मकार जाति में हुआ। लोना देवी इनकी पत्नी का नाम और इनके पुत्र का नाम विजय दास है । यह उस समय के सर्वमान्य संत कबीर दास जी के गुरु रामानंद जी के प्रिय शिष्यों में से एक हैं। इनकी रचनाएं निर्गुण ब्रह्म की उपासना से प्रेरित समाज सुधार और भक्ति मार्ग में जातीय मर्यादाओं को अमान्य करने वाली हैं। इनके बहुत से पद आज भी बड़ी श्रद्धा के साथ गाये जाते हैं जिनमें दर्शन दीजै,तुम्हारी याद, मन ही पूजा तथा तुम चंदन हम पानी अत्यंत प्रसिद्ध हैं। इनके पारिवारिक भरण पोषण का माध्यम अपना जातीय व्यवसाय मोची कर्म था। इनकी मृत्यु बनारस में ही सन् 1528 ईस्वी में हुई।
महात्मा कबीर के समान ही इन्होंने भी तत्कालीन समाज की कुरीतियों को अपनी रचनाओं का निशाना बनाया। गिरिधर गोपाल की दीवानी राजस्थान की पवित्र वलिदानी माटी में जन्मी कृष्ण भक्त मीराबाई जी इन्हीं की शिष्या थीं। इस पुनीत पर्व पर समस्त कृतज्ञ भारतीय समाज ही नहीं, संपूर्ण विश्व इन्हें अत्यंत श्रद्धा पूर्वक अपना नमन निवेदित करता है।
“चंदन- पानी सी भगति , मन में दृढ़ विश्वास।
रमे राम में नित्य ही, पूज्य संत रविदास।।”
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चंदन- पानी सी भगति , मन में दृढ़ विश्वास।रमे राम में नित्य ही, पूज्य संत रविदास।।” 1 फरवरी 2026 : संत रविदास जयंतीलेखक : शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी
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