इस बार 11 अक्टूबर 2026 से आरंभ होकर 19 अक्टूबर 2026 तक नवदिवसीय नवरात्रि रहेगी । 20 अक्टूबर को नवरात्रि का समापन एवं विजयदशमी पर्व है। यह नवदिवसीय पर्व एक साथ कई संकेत करता है । प्रथम – प्राचीन मातृसत्ताक समाज की स्मृति एवं महत्ता, द्वितीय – आसुर समाज के संग्राम मे पुरुषों की पराजय के पश्चात नारी शक्ति का समवेत अभ्युदय तथा तृतीय – सामूहिक नारी शक्ति का विजयगान।
नवरात्रों की संपूर्ण कथा मार्कंडेय पुराण के देवी माहात्म्य से संबंधित 13 अध्यायों से ग्रहण की गई है जो आज देवी उपासकों का ‘दुर्गा सप्तशती’ के नाम से अत्यंत प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसका आदि स्रोत ऋग्वेद का वागंभृणी या वाक् सूक्त है जिसकी ऋषिका स्वयं वागंभृणी ही है । इसका प्रमुख मंत्र “अहम् रुद्राय धनुरा तनोमि,
ब्रह्मद्विषे शरवे हंत वाउ।
अहम् जनाय समदं कृणोम्यहम्,
द्यावा पृथ्वी आविवेश।।”
(ऋग्वेद10/125/06)
है।
“मैं ब्रह्मद्वेषी हिंसकों को मारने के हेतु से ,
हूं रुद्र का भीषण – भयद कोदंड क्षण में तानती।
अपने जनों के त्राण हित करती महासंग्राम हूं,
मैं ही द्युलोक- वसुंधरा में प्राप्त बहुविध हो रही।।” (स्वरचित पद्यानुवाद ‘वेदभारती’ पृष्ठ संख्या 40)
यह नवदिवसीय पर्व “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते,रमंते तत्र देवता:।
यत्रैतास्तु न पूज्यंते सर्वास्तत्रा: क्रिया: अफला:।।” का भी संकेतक है।
बहुत से विद्वानों की मान्यता है कि
विजयदशमी के दिन पुरुषोत्तम राम ने वर्षा ऋतु के पश्चात प्रहर्षण पर्वत से लंका विजय का अभियान आरंभ किया था। इस दिन रावण के पुतले को जलाने का सांकेतिक अर्थ बुराइयों के ऊपर अच्छाइयों की विजय मात्र है क्योंकि इसके बहुत बाद चैत्र शुक्ल चतुर्दशी को रावण का वध हुआ और चैत्र पूर्णिमा को उसका दाह संस्कार संपन्न हुआ था।
“नारी के ही रूप में, नवदुर्गा साकार।
अतः कभी मत भूलिए,उससे शिष्टाचार।।”
” किसके भीतर है बसा, रावण अथवा राम।
लोग जान जाते तुरत , देख व्यक्ति का काम ।।”





