फतेहपुर। होली पर्व से ठीक पहले जिले में बिक रहे अबीर-गुलाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों का दावा है कि बड़े पैमाने पर केमिकल और घरों में उपयोग होने वाली पीओपी (Plaster of Paris) के जरिए रंग-बिरंगे अबीर-गुलाल तैयार किए जा रहे हैं। यदि यह सच है तो ऐसे रंग लोगों की त्वचा, आंखों और सांस संबंधी समस्याओं के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।
हरिहरगंज इलाके में कथित प्लांट की चर्चा
स्थानीय सूत्रों का यह भी आरोप है कि हरिहरगंज क्षेत्र में एक कथित राजनीतिक व्यक्ति से जुड़े लोगों द्वारा रंग अबीर गुलाल करने का प्लांट संचालित किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष की ओर से भी इस पर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
विभाग को नहीं जानकारी?
दावा किया जा रहा है कि संबंधित विभागों—जैसे औषधि/केमिस्ट या खाद्य सुरक्षा और प्रशासन—को इस गतिविधि की भनक तक नहीं है। यदि केमिकल युक्त रंग बिना मानक जांच के बाजार में बेचे जा रहे हैं, तो यह उपभोक्ता सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
सेहत पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न स्तर या औद्योगिक केमिकल से बने रंगों से—
त्वचा एलर्जी, खुजली, जलन
आंखों में संक्रमण या सूजन
सांस लेने में दिक्कत
बच्चों और बुजुर्गों में गंभीर रिएक्शन
जैसी समस्याएं हो सकती हैं। POP का बारीक चूर्ण त्वचा और श्वसन तंत्र के लिए नुकसानदेह माना जाता है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि—
संदिग्ध इकाइयों की जांच कराई जाए
बाजार में बिक रहे रंगों के सैंपल लिए जाएं
मानक विहीन उत्पादों पर तत्काल रोक लगे।








