संवाददाता आलोक तिवारी
मथुरा – विश्वभर के लोग जानते और मानते हैं कि मथुरा वृन्दावन एक धार्मिक स्थल है, भगवान श्रीराधा कृष्ण की जन्मस्थली और लीलास्थली है। सनातन को मानने वाले और धार्मिक लोग मानते हैं कि आज भी भगवान श्रीराधाकृष्ण ब्रजभूमि में लीला करते हैं । श्रद्धालु भक्तों की श्रद्धा और कुछ आलौकिक घटनायें भी इन लीला कथाओं की पुष्टि करतीं हैं । आज-कल मथुरा वृन्दावन के संत, मुनि, ऋषि, भागवताचार्य, गौस्वामी, पंडित-पुजारी कथाओं के माध्यम से भगवान की लीलाओं का वर्णन इस प्रकार कर रहे हैं कि दुनियां के लोगों की श्रद्धा और रूचि मथुरा वृन्दावन में हो रही है । जिसके कारण हर वर्ष देश-विदेश के करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु भक्त ब्रज में आ रहे हैं ।
मथुरा वृन्दावन में जो मंदिर बने हुये हैं वे बहुत प्राचीन हैं, उसी तरह ये मथुरा और वृन्दावन काफी पुराने शहर हैं जिनकी गलियां, सड़कें और मकान भी काफी पुराने और संकीर्ण हैं । वर्तमान में प्रतिवर्ष लाखों-करोड़ो श्रद्धालु भक्त मथुरा, वृन्दावन, गोवर्धन, बरसाना, गोकुल, नन्दगांव आदि के मंदिरों में दर्शनों के लिये आते हैं । जब इतनी बड़ी संख्या में भक्त आते हैं तो इन क्षेत्रों विशेषकर वृन्दावन, बरसाना आदि की शांति और व्यवस्था पूरी तरह से भंग हो जाती है । स्थानीय नागरिकों को बड़ी ही असुविधा का सामना करना पड़ता है । यहां कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन भी भीड़ को व्यवस्थित नहीं कर पाते हैं । जिसके कारण पूरे मथुरा जनपद में यातायात व्यवस्था पूरी तरह भंग जाती है और लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ता है ।
वृन्दावन का श्रीबांके बिहारी मंदिर में भीड़ के कारण जो हाल हो रहा है, लोग चीखते, चिल्लाते हैं, बेहोश हो जाते हैं कई घटनाओं में श्रद्धालुओं ने अपने प्राण तक दे दिये हैं । शासन प्रशासन, माननीय सुप्रीम कोर्ट, मंदिर प्रशासन, पंडे-पुजारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती है । कुछ लोगों के निजी स्वार्थ के कारण लाखों श्रद्धालुओं की जिन्दगी से खिलवाड़ नहीं हो सकता है । ये बात माननीय सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन को समझनी चाहिये । इसलिये जितना जल्दी हो सके वृन्दावन के श्रीबांके बिहारी मंदिर का कॉरीडोर अतिशीघ्र बनना चाहिये । ये स्थानीय जनता और लाखों-करोड़ों की मांग है । मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर, बरसाने का राधारानी का मंदिर, बल्देव में दाउजी का मंदिर, गोवर्धन का श्रीगिर्राज जी के मंदिर सहित दर्जनों प्रमुख मंदिर ऐसे हैं जहां अत्याधिक भीड़ के कारण लोगों को परेशानी रहती है ।
मंदिरों के अतिरिक्त पूरे शहर में जो यातायात जाम की स्थिति बनी रहती है यदि कोई उसमें फंस कर रह जाये उसे साक्षात नर्क जैसा अनुभव होता है । अब आवश्यकता है कि मथुरा-वृन्दावन में मास्टर प्लान लाकर यहां की सड़कों को चौड़ा किया जाये और इसे एन.सी.आर. में शामिल कर स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित और सुरक्षित किया जाये । योगी जी को मथुरा, वृन्दावन, गोवर्धन, बरसाना, गोकुल, नन्दगांव सहित ब्रजमण्डल परिक्रमा को जोड़ती हुई मेट्रो रेल सेवा चलानी चाहिये, इससे श्रद्धालुओं बहुत अधिक सुविधा होगी । मथुरा-वृन्दावन में जमीनों के रेट आसमान को छू रहे है उससे यह शहर दिल्ली और नोएडा को भी टक्कर दे रहा है । जिस प्रकार पूरे मथुरा जनपद में देश-विदेश के लोग आकर यहां आकर बस रहे हैं और स्वयं को ब्रजवासी समझ रहे है उससे भी यह शहर का समुचित होना अत्यन्त आवश्यक है ।
मथुरा के दो सांसद, पांच विधायक, मंत्री आदि मिल कर भी ब्रज का उचित विकास करा पाने में असमर्थ हैं । मथुरा के विकास को जितना धन मिलता है उसका पता नहीं क्या होता है शायद उसका बन्दरवाट हो जाता है । ब्रज तीर्थ विकास परिषद गठन और इसके पदाधिकारी अपने दायित्वों का पूर्ति कर पाने में सक्षम हैं । ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को सबसे अधिक गुमराह करत है । यदि मथुरा का विकास करना है तो उसके लिये योगी जी को स्वयं संज्ञान लेना होगा तभी कुछ होगा ।








