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वकील कृष्ण कन्हैया पाल कौन हैं? अखिलेश यादव पर टिप्पणी मामले में BJP सांसद निशिकांत दुबे को मानहानि का नोटिस

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UP Politics: BJP सांसद निशिकांत दुबे को भेजे गए मानहानि नोटिस को लेकर समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक दलों, उनके कार्यकर्ताओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान से भी जुड़ा हुआ है। पाल का कहना है कि किसी राजनीतिक दल और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक मंच पर कथित अपमानजनक टिप्पणी करना कानून के तहत मानहानि की श्रेणी में आ सकता है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

कृष्ण कन्हैया पाल के मुताबिक, विवाद की शुरुआत तब हुई जब बालासुब्रमण्यम नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर कथित आपत्तिजनक पोस्ट साझा की। आरोप है कि BJP सांसद निशिकांत दुबे ने उसी पोस्ट को व्यंग्यात्मक टिप्पणी के साथ रीपोस्ट किया, जिसके बाद उन्होंने कानूनी कार्रवाई का फैसला लिया।

मानहानि नोटिस भेजने की बताई वजह

पाल ने कहा कि वह समाजवादी पार्टी (SP) के फ्रंटल संगठन समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ पेशे से अधिवक्ता भी हैं। उनका कहना है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अगर किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली टिप्पणी की जाती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसी आधार पर उन्होंने निशिकांत दुबे को मानहानि का नोटिस भेजा।

‘कानूनी सलाह लें निशिकांत दुबे’

कृष्ण कन्हैया पाल ने कहा कि अगर BJP सांसद यह सवाल उठा रहे हैं कि उनका व्यक्तिगत रूप से किस प्रकार अपमान हुआ है, तो उन्हें इस विषय में अपने कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए। उनका कहना है कि यह मामला व्यक्तिगत भावना से अधिक संगठन और उसकी प्रतिष्ठा से जुड़ा है।

माफी मांगने का दावा, फिर सोशल मीडिया पोस्ट पर जताई आपत्ति

पाल ने दावा किया कि नोटिस भेजे जाने के बाद निशिकांत दुबे ने उनसे व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी थी। हालांकि, उनका आरोप है कि दूसरी ओर सांसद ने X पर समाजवादी पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं को “चापलूस” बताते हुए समाजवादी विचारधारा को अफवाह फैलाने वाली विचारधारा के रूप में पेश करने की कोशिश की।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पहचान और एक अधिवक्ता के रूप में उनकी गरिमा पर भी टिप्पणी की गई, जिसके बाद उन्होंने अपने वकील के माध्यम से औपचारिक मानहानि नोटिस भेजा।

‘यह लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान का भी प्रश्न’

कृष्ण कन्हैया पाल ने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत सम्मान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में राजनीतिक दलों, उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं की गरिमा का सम्मान होना चाहिए। यदि किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है तो कानून सभी नागरिकों को उचित कानूनी कार्रवाई का अधिकार देता है।

सामाजिक न्याय और संविधान का किया जिक्र

अपने बयान में पाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और वह स्वयं पिछड़े वर्ग से आते हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की राजनीति भारतीय संविधान और सामाजिक न्याय के मूल्यों की रक्षा पर आधारित है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल या उसके नेतृत्व के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

कौन हैं कृष्ण कन्हैया पाल?

कृष्ण कन्हैया पाल पेशे से अधिवक्ता हैं और समाजवादी अधिवक्ता सभा (समाजवादी एडवोकेट एसोसिएशन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हाल ही में उन्होंने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को मानहानि का नोटिस भेजा था। पाल का दावा है कि नोटिस के बाद सांसद ने व्यक्तिगत स्तर पर उनसे माफी मांगी थी। हालांकि, निशिकांत दुबे ने इस दावे को खारिज करते हुए सोशल मीडिया पर स्पष्ट कहा कि उन्होंने किसी से माफी नहीं मांगी है और ऐसा करने का सवाल ही नहीं उठता।

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