फतेहपुर में कक्षा 12 के छात्र तेजस द्विवेदी की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शुरुआती जांच में स्कूल प्रबंधन पर लगे आरोपों से लेकर घटनास्थल, छात्रों के बयान और अब प्रशासनिक जांच तक कई सवाल सामने आ चुके हैं। डीएम द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की जांच में भी कई अहम पहलुओं की पड़ताल की गई है। DIOS ने करीब 15 छात्रों, कक्ष निरीक्षकों और घटना के समय तेजस के साथ मौजूद छात्र से पूछताछ कर बयान दर्ज किए थे। जांच में स्कूल के सरकारी अवकाश के दिन खोले जाने की बात भी सामने आई थी।
अब इसी मामले में सियासी और प्रशासनिक दबाव की चर्चाओं ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मामले की फाइल को आगे की कार्रवाई से रोकने या उसे दफ्तर दाखिल कराने की कोशिशों को लेकर सत्ता से जुड़े कुछ नेताओं के स्तर पर सक्रियता है। यहां तक दावा किया जा रहा है कि सरकारी मशीनरी को प्रभावित करने के लिए अंदरखाने कोई “डील” हुई है। लेकिन शपथ समाचार इसकी पुष्टि नही करता।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए इन्हें जांच का विषय ही माना जाना चाहिए। अगर वास्तव में किसी स्तर पर जांच को प्रभावित करने या मामले को दबाने की कोशिश हुई है तो यह सिर्फ तेजस के परिवार के साथ अन्याय नहीं होगा, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करेगा।
दिलचस्प बात यह है कि सत्ता पक्ष के ही एक गुट के नेताओं द्वारा परिवार के पक्ष में आवाज उठाए जाने की चर्चा है। भाजपा प्रतिनिधिमंडल पहले भी तेजस के परिवार से मिलकर न्याय का भरोसा दे चुका है।
वहीं पुलिस की जांच भी अभी पूरी नहीं हुई है। तेजस 26 अगस्त को स्कूल में परीक्षा के दौरान कथित नकल की पर्ची के मामले में कार्रवाई के बाद घर भेजा गया था। बाद में वह सौरा में पानी की टंकी के पास अचेत मिला और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटनास्थल की कड़ी जोड़ने के लिए पुलिस अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। एक चरवाहे द्वारा सबसे पहले तेजस को अचेत हालत में देखे जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
अब आया GEN Z का सवाल
GEN Z सिर्फ वायरल खबर नहीं देख रही, सवाल भी पूछ रही है—अगर एक छात्र की मौत की जांच हो रही है तो जांच पूरी होने से पहले सिस्टम किसके दबाव में झुक सकता है?
तेजस की मौत हादसा थी, लापरवाही थी या किसी और घटनाक्रम का परिणाम—इसका अंतिम सच जांच से ही सामने आएगा। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच निष्पक्ष तरीके से अपने अंतिम मुकाम तक पहुंचेगी?
परिवार को न्याय, दोषियों पर कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच—यही इस समय फतेहपुर की सबसे बड़ी मांग बनती दिखाई दे रही है।







