फतेहपुर। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 450वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केपी सिंह कछवाह ने की, जबकि संचालन शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ अध्यक्ष केपी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना से किया। उन्होंने मां वीणापाणि की स्तुति करते हुए कहा, “श्वेत हंस वाहिनी मां वीणापाणि, वंदना है, सुन के पुकार मातु, शीघ्र चली आइए। रचना-विधान देके, सर्जना का ज्ञान देके, शब्द-शब्द को संवार कविता सजाइए।”
उन्होंने नाग पंचमी के पर्व पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा, “नाग पंचमी में करें, नागों का सम्मान। हर प्राणी पर हो दया, शिक्षा यही महान।”
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने छंद के माध्यम से कर्मठता का संदेश देते हुए कहा, “कामना ही मंगल का स्रोत, इसी से निर्मित कर्म विधान। रुको मत, होओ नहीं निराश, गुंजाओ कर्मठता के गान।”
प्रदीप कुमार गौड़ ने नाग पंचमी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता पर अपनी रचना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “लोक पर्व है नाग पंचमी, सावन का विशेष त्यौहार। नागदेव को अर्पण करिए, दूध, बताशा, जल की धार।”
डॉ. शिव सागर साहू ने लोकतंत्र में सवाल पूछने के अधिकार को अपनी कविता के माध्यम से उठाते हुए कहा, “लोकतंत्र में प्रश्न पूछना, जनता का अधिकार है। और प्रमाणित आरोपों का भी समुचित सत्कार है।”
काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने स्वतंत्रता और वीर शहीदों को समर्पित मुक्तक प्रस्तुत करते हुए कहा, “यह आज़ादी जो हमें मिली, है वीर शहीदों की थाती। इसको संभाल रखने के हित, चाहिए वज्र जैसी छाती।”
उन्होंने भारतीय संस्कृति की उदारता को रेखांकित करते हुए आगे पढ़ा, “भारतीय संस्कृति के जैसी, और संस्कृति कौन उदार। नागों को भी दूध पिलाकर, जिसने किया अमित सत्कार।”
गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकार, लोकतांत्रिक मूल्यों और पर्व-परंपराओं को स्वर दिया। 450वीं साप्ताहिक काव्य गोष्ठी के आयोजन को साहित्य प्रेमियों ने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
कार्यक्रम के अंत में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल ने सभी कवियों एवं साहित्य प्रेमियों को आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने सभी अतिथियों, कवियों एवं उपस्थित साहित्य प्रेमियों का आभार व्यक्त किया।
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शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 450वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी संपन्न
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