नरसिंह मौर्य,असोथर फतेहपुर
नगर पंचायत असोथर के प्राचीन अश्वस्थामा मंदिर प्रांगण में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ऐतिहासिक रामलीला में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी। बुधवार को फुलवारी लीला के बाद मंच पर जब धनुष भंग और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का प्रसंग प्रस्तुत हुआ, तो पूरा पंडाल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। रामलीला की शुरुआत मुख्य अतिथि पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुधीर त्रिपाठी और पूर्व जिला पंचायत सदस्य चुन्ना बाबा ने फीता काटकर की। इसके पश्चात भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की पूजा-अर्चना तथा आरती के साथ मंचन आरंभ हुआ। परंपरा के अनुसार गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण संध्या वंदन के बाद मिथिला के लिए प्रस्थान करते हैं। उधर जनकपुरी में सीता स्वयंवर की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, जहां देश-विदेश के राजा अपनी वीरता आज़माने आए थे। लेकिन कोई भी शिवधनुष को तनिक भी हिला नहीं सका।
राजा जनक ने जब निराशा में कहा कि अब तो लगता है धरती वीरों से रिक्त हो गई है, तभी लक्ष्मण का तेजपूर्ण रूप देखने को मिला। उन्होंने कहा यदि भैया अनुमति दें तो यह धनुष क्या, पूरी जनकपुरी को हिला दूं। गुरु की आज्ञा से जब भगवान राम ने सहज भाव से धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाई, तो वह दो भागों में भंग हो गया। उसी क्षण मैदान जयघोषों से गूंज उठा, सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डालकर स्वयंवर पूर्ण किया, और सखियों ने मंगल गीत गाए। श्रद्धालु भावविभोर होकर भगवान की आरती उतारने लगे।
धनुष टूटने की घटना के साथ ही मंच पर परशुराम प्रवेश का दृश्य हुआ। उनके क्रोध से सभा कांप उठी। परशुराम ने राजा जनक से प्रश्न किया — “किसने महादेव का धनुष तोड़ा?” इस पर सभा में सन्नाटा छा गया। तभी लक्ष्मण का तीखा संवाद वातावरण में गूंजा — “यह धनुष भगवान राम ने तोड़ा है, और यदि आप इसे पाप मानते हैं तो आपका क्रोध भी हम झेल लेंगे।”
लक्ष्मण और परशुराम के बीच चले इस संवाद की कड़ी भोर पहर 4 बजे से लेकर प्रातः 10 बजे तक चली। दर्शक मंत्रमुग्ध होकर हर संवाद पर तालियां बजाते रहे। अंततः जब भगवान श्रीराम ने विनम्रता से परशुराम को अपनी पहचान कराई, तो परशुराम भावविभोर होकर बोले “अब मुझे ज्ञात हुआ कि आप स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं।” उन्होंने श्रीराम के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद दिया और जनकपुरी से प्रस्थान किया।
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पंडित रामकिंकर अवस्थी, सदस्य राजेश श्रीवास्तव, काशी गुप्ता, लक्ष्मी चंद्र आर्य सहित समस्त समिति के 150 सदस्य आयोजन में सक्रिय रहे। इस अवसर पर जनपद और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। वहीं सुरक्षा के दृष्टि से असोथर पुलिस भी मौजूद रहा। कमेटी की ओर से बताया गया कि आगामी वर्षों में भी असोथर की यह परंपरागत रामलीला और अधिक भव्य स्वरूप में आयोजित की जाएगी।
दूसरे जनपदों से आए कलाकारों हिमांशु अवस्थी (राम), प्रदीप पांडेय (लक्ष्मण), नवल तिवारी (रावण) और गोपाल अवस्थी (परशुराम) के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को रामायण काल में पहुंचा दिया।






