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एआई व डीपफेक पर सख़्त नियमन की माँग, सुप्रीम कोर्ट के मामले के बाद केंद्र सरकार को भेजी गई सिफ़ारिशें फतेहपुर के हैं याचिकाकर्ता आरती साह के अधिवक्ता अनिमेष शुक्ला

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फतेहपुर। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण क़दम उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट में एक मामले के पश्चात याचिकाकर्ता आरती साह की ओर से अधिवक्ता अनिमेष शुक्ला ने भारत सरकार को विस्तृत नीतिगत सिफ़ारिशें भेजी हैं। यह पत्र इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को संबोधित है, जिसमें देश में ए.आई. और डीपफेक कंटेंट के प्रभावी नियमन की आवश्यकता पर बल दिया गया है। यह पत्र सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन रहे आरती साह बनाम भारत संघ (रिट याचिका (सिविल) संख्या 1127/2025) की पृष्ठभूमि में भेजा गया है, जिसमें डीपफेक तकनीक से उत्पन्न सामाजिक, कानूनी और मनोवैज्ञानिक ख़तरों को उजागर किया गया था। न्यायालय ने 04 दिसंबर 2025 को पारित आदेश में सरकार द्वारा ए.आई. -जनित सामग्री से संबंधित ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक करने की पहल का संज्ञान लेते हुए याचिका का निस्तारण किया था, साथ ही विषय को सक्षम मंत्रालयों के विवेक पर छोड़ दिया था।
   इसी क्रम में अधिवक्ता अनिमेष शुक्ला ने सार्वजनिक हित में मंत्रालय को एक विस्तृत सुझाव-पत्र भेजते हुए कहा है कि वर्तमान कानूनी ढांचा—जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कुछ धाराएँ और भारतीय दंड संहिता के प्रावधान शामिल हैं—डीपफेक जैसे उन्नत और तेज़ी से फैलने वाले डिजिटल ख़तरों से निपटने के लिए अपर्याप्त हैं। पत्र में विशेष रूप से महिलाओं, नाबालिगों और सार्वजनिक व्यक्तियों को निशाना बनाकर बनाए जा रहे अश्लील डीपफेक, धोखाधड़ी, चुनावी दुष्प्रचार और नक़ली समाचार वीडियो पर गंभीर चिंता जताई गई है।
    सिफ़ारिशों में ए.आई. जनित कंटेंट पर अनिवार्य वॉटरमार्किंग, उच्च-जोखिम ए.आई. टूल्स के लिए उपयोगकर्ता सत्यापन, समयबद्ध कंटेंट हटाने की प्रक्रिया, डीपफेक अपराधों के लिए अलग से दंडात्मक प्रावधान, तथा राष्ट्रीय स्तर पर ए.आई. फ़ॉरेंसिक प्रयोगशाला की स्थापना जैसे ठोस सुझाव शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पीड़ित-केंद्रित रिपोर्टिंग तंत्र और चुनावी अवधि में राजनीतिक डीपफेक पर विशेष निगरानी की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया है।
    पत्र में यह भी कहा गया है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पुलिस, अभियोजन एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों को ए.आई.-संबंधी तकनीकी प्रशिक्षण देना तथा आम नागरिकों के लिए डिजिटल साक्षरता अभियान चलाना भी अत्यंत आवश्यक है।
   मूलतः फतेहपुर के अधिवक्ता अनिमेष शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि ये सिफ़ारिशें सरकार को एक संतुलित और भविष्य-दृष्टि से युक्त नियामक ढांचा तैयार करने में सहायता देने के उद्देश्य से दी गई हैं, जिससे एक ओर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके और दूसरी ओर तकनीकी नवाचार को भी प्रोत्साहन मिले।

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