फतेहपुर में नगरपालिका परिषद के अंतर्गत बने धौबी घाट अमृत सरोवर को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि करीब 1 करोड़ 34 लाख 25 हजार रुपये की लागत से हुए इस कार्य में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। मामला तब और चर्चा में आ गया जब लोगों ने शिलान्यास पत्थर पर दर्ज तारीखों और टेंडर प्रक्रिया का मिलान किया।
जानकारी के अनुसार इस परियोजना का टेंडर जनवरी 2024 में जारी हुआ था, जबकि उद्घाटन 12 मार्च 2024 को कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी धनराशि का कार्य महज लगभग दो महीनों में कैसे पूरा हो गया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना में निर्माण, सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्य इतने कम समय में पूरा होना तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई संदेह पैदा करता है।
लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि शिलान्यास पत्थर पर स्पष्ट रूप से यह उल्लेख नहीं किया गया कि शिलान्यास किस जनप्रतिनिधि या अधिकारी द्वारा किया गया। इससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि केवल नाम का पत्थर लगाकर औपचारिकता पूरी कर दी गई हो ताकि भविष्य में कोई जवाबदेही तय न हो सके।
सोशल मीडिया पर भी लोग धौबी घाट अमृत सरोवर पहुंचकर फोटो और वीडियो साझा करने की अपील कर रहे हैं। जागरूक नागरिकों का कहना है कि जनता के पैसे से हुए विकास कार्यों की जांच और निगरानी करना जनता का अधिकार है।
अब सवाल यह है कि क्या नगरपालिका परिषद इस मामले में सामने आकर सफाई देगी या फिर करोड़ों रुपये के इस काम में घोटाले की बदबू यूं ही उठती रहेगी। जनता जवाब चाहती है और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी उंगलियां उठने लगी हैं।






