फतेहपुर। जिले में सहकारिता विभाग लम्बे समय से भारी-भरकम बकायेदारी वसूल नहीं कर पा रहा है या यूं कहें कि विभाग का सिस्टम इतना जर्जर है कि इस सन्दर्भ में जिम्मेदार गंभीर ही नहीं हैं। वैसे शासन ने इस बड़ी रकम की वसूली के लिए सूबे के प्रत्येक जिले में अलग से “संग्रह अनुभाग” बना रखा है, जो एक “गैर सरकारी इकाई” है जिसका काम तीनों सेक्टर में काम करके बकाए की वसूली करना है किन्तु यह इकाई अपनी स्थापना के उद्देश्य से पूरी तरह भटक चुकी है और इसके कर्मचारियों से संग्रह अनुभाग के अतिरिक्त और भी पटलों का काम लिए जाने से बकाया वसूली बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं और बकायेदारी बढ़ती जा रही हैं। ख़बर है कि शासन ने ज़िले में “डेढ़ अरब” से अधिक की “सहकारी बकायेदारी” के प्रति गंभीरता दिखाते हुए इस सीजन हर हाल में 60 फ़ीसदी वसूली कराने के निर्देश सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता के साथ-साथ, डी.एम. और सी.डी.ओ. को दिए थे जिसके विपरीत अब तक कुछ लाख की ही वसूली हो पाई है। जबकि वसूली सत्र अगले माह समाप्त होने वाला है।
ग़ौरतलब है कि सूबे में 80 के दशक में सहकारिता के “उरुच” के वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्रा ने प्रदेश में सहकारिता विभाग से संबंधित भूमि विकास बैंक (एल.डी.बी.), ज़िला सहकारी बैंक और कृषि ऋण समितियों (बी.पैक्स) की निरंतर बढ़ती बकायेदारी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उद्देश्यपूर्ण “संग्रह अनुभाग” की स्थापना की थी, जिसे सभी जनपद मुख्यालयों में सहकारिता विभाग (ए.आर.सी.एस. कार्यालय) में एक अतिरिक्त कक्ष देकर समूचे संसाधनों और अधिकार के साथ स्थापित किया गया था। शासन ने ज़िला स्तर पर “संग्रह अनुभाग” का नियंत्रण ज़िला सहायक निबंधक को सौंपा किन्तु अब इस परिवर्तित पद नाम सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता के पद पर तैनात मोहसिन जमील इस मद में कतई गंभीर नहीं दिखते हैं।
मौजूदा समय में उपरोक्त “संग्रह अनुभाग” पर डेढ़ अरब से अधिक की वसूली का काफ़ी दबाव है, जिसमें भूमि विकास बैंक (एल.डी.बी.) का लगभग 15.5 करोड़, ज़िला सहकारी बैंक का लगभग 1.25 अरब और कृषि ऋण समितियों (बी. पैक्स) का लगभग 7.16 करोड़ लम्बे समय से बकाया है, जिसकी वसूली के प्रति संग्रह अनुभाग कतई गंभीर नहीं दिखता हैं। ख़बर है कि लगभग दो वर्ष के अपने कार्यकाल में मौजूदा ए.आर.सी.एस. ने संग्रह अनुभाग से संबंधित कर्मचारियों की एक बार भी न तो बैठक बुलाई और न ही अधीनस्थ कर्मचारियों को सलीके से कोई दिशा-निर्देश ही जारी किए। इतना ही न ही डीएम और सीडीओ को भी इस बाबत कोई रिपोर्ट दी गई। जिला प्रशासन भी उपरोक्त के सन्दर्भ में गंभीर नहीं लगता। विभिन्न मदो के देयों की वसूली की समीक्षा में कभी भी भारी भरकम सहकारी देयों की वसूली को शामिल करके समीक्षा क्यों नहीं की जाती, यह अपने आप में यक्ष प्रश्न बना हुआ हैं।
सूत्रों की मानें तो शासन ने पिछले वित्तीय वर्ष में इस वसूली पर ख़ास गौर करने और इस ज़िले में कम से कम 60 फ़ीसदी बकाया हर हाल में वसूले जाने के सख्त निर्देश दिए थे। साथ ही यह भी निर्देश थे कि “संग्रह सहायक से किसी भी हाल में दूसरे पटल का काम न लिया जाए” किन्तु मौजूदा समय में ए.आर.सी.एस. मोहसिन जमील द्वारा स्थानीय “एक मात्र संग्रह सहायक अनिल वर्मा” को संग्रह पटल के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण “मूल्य समर्थन पटल” एवं “ग्रामीण गोदाम पटल” समेत चार अन्य अतिरिक्त पटलों का कार्यभार सौंपा गया है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए एक शिकायतीपत्र में लगभग डेढ़ दशक पूर्व प्रदेश सरकार के तत्कालीन नागरिक सुरक्षा राज्य मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल के विशेष प्रयासों से ज़िला सहकारी बैंक (फतेहपुर) की उजागर हुईं सौ करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं के प्रकरण की पुनः गंभीरता से जांच कराने और इस गड़बड़ी के साथ-साथ एलडीबी और कृषि ऋण समितियों में हुईं व्यापक गड़बड़ियों की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायतीपत्र में सहकारिता के संग्रह अनुभाग की भूमिका और सहकारिता विभाग द्वारा पोषित कुछ चर्चित प्रकरणों के प्रति शासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया है।
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फतेहपुर : डेढ़ अरब के क़रीब बकायेदारी की वसूली के प्रति कतई गंभीर नहीं सहकारिता विभाग
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