फतेहपुर। जिले में किसानों की मेहनत की कमाई पर कथित तौर पर डाका डालने वाला घटतौली का एक नया नेटवर्क सक्रिय होने की चर्चा है। हुसैनगंज थाना क्षेत्र के बहलोलपुर गांव और उसके आसपास के करीब डेढ़ दर्जन से अधिक युवकों पर संगठित तरीके से धान की खरीद में घटतौली करने का आरोप लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क में रिमोट से संचालित होने वाले इलेक्ट्रॉनिक कांटों का इस्तेमाल कर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पूरे मामले की शिकायत चन्द्रभान नाम के किसान ने शासन प्रशासन से की है।
सूत्रों के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क का मुख्य संचालन बहलोलपुर गांव से होता है। आरोप है कि दो सगे भाई इस पूरे नेटवर्क के प्रमुख संचालक हैं। चर्चा में गोलू, डब्लू, मोटू, पतलू और प्रकाश समेत कई अन्य युवकों के नाम सामने आ रहे हैं। बताया जाता है कि यह गिरोह आधा दर्जन से अधिक पिकअप गाड़ियों के जरिए अलग-अलग गांवों और बाजारों में पहुंचकर किसानों तथा छोटे व्यापारियों से धान की खरीद करता है।
घटतौली का कथित तरीका भी बेहद शातिर बताया जा रहा है। आरोप है कि धान की तौल के दौरान एक युवक रिमोट लेकर इलेक्ट्रॉनिक कांटे से कुछ दूरी पर बैठ जाता है और वहीं से कांटे की रीडिंग को नियंत्रित करता है। इसके जरिए एक क्विंटल धान की तौल में करीब 25 किलोग्राम तक की कथित घटतौली किए जाने का दावा किया जा रहा है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो किसानों को हर दिन लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।
सूत्रों का दावा है कि इस नेटवर्क के कुछ सदस्यों का नाम पूर्व में बांदा जिले बबेरू में भी घटतौली के एक मामले में सामने आया था। कथित तौर पर वहां कार्रवाई के बाद मामला निपटने और आरोपियों के छूटने की चर्चा है। इतना ही नहीं, हाल ही में सात मील में भी चावल की तौल में गड़बड़ी के आरोप में कुछ लोगों को पकड़े जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन पुराने मामलों की आधिकारिक पुष्टि और पुलिस रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क का दायरा केवल फतेहपुर तक सीमित नहीं है। बांदा, हमीरपुर और रायबरेली समेत आसपास के कई जिलों में भी इसकी सक्रियता की चर्चा है। नेटवर्क में करीब एक दर्जन मजदूरों के इस्तेमाल की बात सामने आ रही है, जो अलग-अलग स्थानों पर धान की खरीद और ढुलाई में लगाए जाते हैं।
सबसे गंभीर आरोप स्थानीय स्तर पर कथित पुलिस संरक्षण को लेकर लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि इस पूरे खेल की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि, पुलिस की मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि किसानों की फसल की तौल में कथित हेराफेरी करने वाले इस नेटवर्क की जांच कब होगी? क्या पुलिस रिमोट से संचालित कांटों, पिकअप गाड़ियों और खरीद के पूरे नेटवर्क की जांच कर किसानों को राहत दिलाएगी या फिर किसान इसी तरह अपनी मेहनत की कमाई गंवाते रहेंगे?






