नरसिंह मौर्य, असोथर (फतेहपुर)
विकासखंड असोथर क्षेत्र की ग्राम पंचायत मवइया में पंचायत व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गई है। वर्ष 2008-09 में शुरू हुआ मिनी सचिवालय का निर्माण आज तक पूरा नहीं हो सका। उद्घाटन से पहले ही भवन जर्जर हो गया और पिछले 17 वर्षों से सचिवालय में ताला लटका हुआ है।
सचिवालय बंद होने के कारण ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। वर्तमान में पंचायत का संचालन प्रधान के घर से किया जा रहा है, जहां जाने में कई ग्रामीण असहज महसूस करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई की कोई नियमित व्यवस्था नहीं है, जिससे उनकी समस्याएं लंबित पड़ी हैं। पंचायत सचिव और सहायक के बैठने के लिए भी कोई स्थायी स्थान नहीं है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है।
गांव के रामकुमार, शिवप्रसाद, फूलचंद्र, रामदेवी और मुन्नीलाल का आरोप है कि पंचायत सहायक कंचन देवी अपने पति के साथ बांदा जनपद में रहती हैं और वहीं से कार्य करने का दावा करती हैं। गांव में उनकी उपस्थिति बहुत कम रहती है। कभी-कभार उनके पति आकर औपचारिकताएं पूरी कर लौट जाते हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वहीं, संतोष कुमार, राजकली और हरिश्चंद्र का कहना है कि पंचायत सचिव गोरेलाल और सहायक चाहें तो गांव के किसी विद्यालय में बैठकर काम कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा। वर्षों से चली आ रही इस व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पूर्व में तैनात खंड विकास अधिकारी की छत्रछाया में कई अनियमितताएं हुईं, जिससे पंचायत व्यवस्था कमजोर हो गई। हालात ऐसे हैं कि लोगों को सामान्य कार्यों के लिए भी कस्बा गाजीपुर और जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
खंड विकास अधिकारी राहुल मिश्रा ने बताया कि पंचायत भवन न होने की रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है। बजट मिलने पर नया पंचायत भवन बनवाया जाएगा। वहीं जिला पंचायत राज अधिकारी राम शंकर वर्मा ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। यदि मामूली मरम्मत से भवन चालू हो सकता है तो उसे जल्द शुरू कराया जाएगा।






