बरेली। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा स्कूलों और कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू करने की बात पर अब बरेली से बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने राज्यपाल के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों में एक समान यूनिफॉर्म जरूरी है और इसे हिजाब विवाद से जोड़कर माहौल खराब नहीं किया जाना चाहिए।
बरेली में मीडिया से बातचीत करते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और मदरसों में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं के लिए तय ड्रेस कोड होना चाहिए। उनका कहना है कि एक जैसी यूनिफॉर्म से अनुशासन और समानता की भावना मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के ज्यादातर स्कूलों और कॉलेजों में पहले से ही यूनिफॉर्म लागू है, इसलिए राज्यपाल के बयान को लेकर नया विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। मौलाना ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर इस मुद्दे को हिजाब से जोड़कर हिंदू-मुस्लिम रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि असली मुद्दा सिर्फ ड्रेस कोड का है।
हिजाब विवाद पर मौलाना ने एक सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम छात्राएं घर से हिजाब पहनकर स्कूल जाएं और क्लास के अंदर तय यूनिफॉर्म में पढ़ाई करें। छुट्टी के बाद बाहर निकलते समय दोबारा हिजाब पहन सकती हैं। उनका कहना है कि इससे किसी प्रकार का विवाद नहीं होगा और पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित नहीं होगा।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि शिक्षा सबसे अहम है और धार्मिक या राजनीतिक विवादों से स्कूल-कॉलेजों का वातावरण खराब नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल स्कूल और कॉलेज ही नहीं बल्कि मदरसों और संस्कृत पाठशालाओं में भी यूनिफॉर्म लागू होनी चाहिए ताकि सभी बच्चों में बराबरी की भावना बनी रहे।
फिलहाल ड्रेस कोड और हिजाब को लेकर चल रही बहस के बीच मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।






