रिपोर्ट-नर्सिंग मौर्य
असोथर/फतेहपुर। असोथर थाना क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। यमुना कछार के जरौली, सरकंडी, मैकुवापुर, कठौता और बदलेवा गांवों में दिन-रात जेसीबी मशीनों से मिट्टी की खुदाई की जा रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी डंपरों के जरिए ओवरलोड मिट्टी का परिवहन कर ऊंचे दामों पर बिक्री की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने सरकंडी स्थित पुलिस विभाग के अधीन चांदमारी की जमीन को भी नहीं छोड़ा। इलाके में लगातार जेसीबी मशीनों की गरज और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से लोगों में भारी नाराजगी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्यों और प्लॉट भराई के लिए मिट्टी की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन नियमानुसार पट्टा, परमिशन और रॉयल्टी जमा कर ही खनन होना चाहिए। आरोप है कि असोथर क्षेत्र में बिना किसी अनुमति के 8 से 10 जेसीबी मशीनें लगातार मिट्टी खोद रही हैं और दर्जनों वाहन ओवरलोड मिट्टी ढो रहे हैं।
लोगों ने सवाल उठाया कि पुलिस, राजस्व, वन और खनिज विभाग की जानकारी के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन आखिर कैसे संभव है। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद कार्रवाई न होने से जिम्मेदार विभागों की मिलीभगत की आशंका भी गहराती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार सरकंडी पुलिस चौकी के आसपास तक अवैध खनन खुलेआम हो रहा है। इससे खेतों की उर्वरता खत्म हो रही है, भूजल स्तर प्रभावित हो रहा है और बारिश के दौरान पानी के बहाव व कटाव से भौगोलिक स्थिति बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है। वहीं ओवरलोड डंपरों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
जिलाधिकारी द्वारा रात में अवैध खनन पर सख्त रोक के निर्देश दिए जाने के बावजूद खनन जारी रहने से प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि अवैध खनन तत्काल बंद कराया जाए और खनन कारोबारियों के साथ-साथ संरक्षण देने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
खनिज अधिकारी देशराज पटेल ने बताया कि जरौली और सरकंडी क्षेत्र में मिट्टी खनन की कोई अनुमति सक्रिय नहीं है। वहीं तहसीलदार अमरेश कुमार ने कहा कि उन्हें मिट्टी खनन की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।






