कांकेर (छत्तीसगढ़),राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती के अवसर पर ‘सुख़न का आशिया’ संस्था के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय ऑनलाइन साहित्यिक गोष्ठी में साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में देशभर के साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से राष्ट्रकवि को स्वरांजलि अर्पित की, वहीं मानवता का परिचय देते हुए कांकेर जिले के ग्राम चरभट्टी की 7 वर्षीय आदिवासी बालिका चांदनी की शिक्षा के लिए ₹10,500 की सहयोग राशि एकत्रित कर 3 अगस्त को उसके परिवार को भेंट की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कांकेर की शिक्षाविद, समाजसेवी एवं कवयित्री ममता साहू ने की, जबकि मुख्य अतिथि नरेंद्र सिंह (बिहार) रहे। गोष्ठी का संचालन केविन चौहान (बाड़मेर) ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत नरेंद्र सिंह की सरस्वती वंदना तथा साधना शाही एवं सुनील कुमार खुराना के स्वागत गीतों से हुई। इस अवसर पर कवयित्री साधना शाही का जन्मदिन भी साहित्यिक परिवार ने उत्साहपूर्वक मनाया।
काव्य पाठ के दौरान कृष्ण कुमार चंद्रा के गीत, केविन चौहान और डॉ. संजीदा खानम शाहीन की ग़ज़लें तथा मेघा अग्रवाल के मुक्तकों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। वहीं कृष्णा जोशी, सुरभि शुक्ला, गरिमा लखनवी, सावित्री नेताम, काजल वर्मा और रमेश चंद्रा ने भी अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
अध्यक्ष ममता साहू ने सभी प्रस्तुतियों की गहन, संतुलित एवं सारगर्भित समीक्षा करते हुए साहित्य के सामाजिक दायित्वों पर प्रकाश डाला। देशभर से जुड़े साहित्यकारों, भामाशाहों और प्रबुद्धजनों की गरिमामयी उपस्थिति के बीच आयोजित इस प्रेरणादायी गोष्ठी का समापन डॉ. संजीदा खानम और सुरभि शुक्ला के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि साहित्य केवल शब्दों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशीलता और मानवता की सेवा का सशक्त माध्यम भी है।
Trending Now
काव्य रस की सरिता संग मानवता का संदेश: ‘सुख़न का आशिया’ की गोष्ठी में राष्ट्रकवि को दी स्वरांजलि, आदिवासी बालिका की शिक्षा के लिए जुटाए ₹10,500
👁 16.8K views







