नरसिंह मौर्य असोथर फतेहपुर
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के असोथर ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत सरकंडी में विकास कार्यों में कथित करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की जांच के दौरान बुधवार को बड़ा बवाल हो गया। जिले से पहुंची जांच टीम के सामने ही दो बाहुबली गुटों के बीच वर्चस्व को लेकर जमकर मारपीट हुई। लाठी-डंडे चले और गांव में अफरातफरी मच गई। घटना में दोनों पक्षों से 13 लोग घायल हो गए, जिन्हें पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया है। मामले में पुलिस ने 28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, लापरवाही बरतने के आरोप में एसपी ने थानाध्यक्ष असोथर अभिलाष तिवारी को निलंबित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, सरकंडी ग्राम पंचायत में पिछले करीब 20 वर्षों से मोरंग खदान संचालक संतोष द्विवेदी का प्रभाव बताया जाता है। वर्तमान में उनकी पत्नी पुष्पा देवी ग्राम प्रधान हैं। ग्रामीणों ने नाली, खड़ंजा, मनरेगा और आवास आवंटन जैसे विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और गबन के आरोप लगाते हुए कई माह पूर्व मुख्यमंत्री और लखनऊ प्रशासन से शिकायत की थी।
शिकायत के बाद करीब अक्टूबर माह में पहले लखनऊ से आई जांच टीम ने सचिव समेत ब्लॉक स्तर के 10 कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन ग्रामीण इससे संतुष्ट नहीं हुए और दोबारा जांच की मांग की। इसी क्रम में बुधवार को जिले से पीडी, पीडब्ल्यूडी सहित करीब 10 अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम सरकंडी पहुंची। टीम ने गांव में बैठक करने के बाद मुंजी कुआं समेत पांच स्थानों पर पहुंचकर नापजोख और जांच शुरू की।
इसी दौरान रास्ते में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। सरकंडी चौकी प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी दोनों पक्षों को अलग करने का प्रयास करते रहे, लेकिन करीब एक सैकड़ा लोगों ने एक-दूसरे पर हमला बोल दिया। हालात बेकाबू होते देख जांच टीम मौके पर फंस गई। बाद में थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और किसी तरह जांच टीम को सुरक्षित बाहर निकालकर जिला मुख्यालय भेजा गया।
घटना के बाद गांव में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पूरे मामले में एसपी अनूप सिंह ने थाना प्रभारी पर शिथिलता बरतने का आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
वहीं, वर्चस्व की इस लड़ाई में पूर्व असोथर ब्लॉक प्रमुख सुधीर त्रिपाठी भी खुलकर सामने आ गए। उन्होंने प्रधान प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी पर अराजकता फैलाने, असलहों का प्रदर्शन करने और मारपीट कराने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, संतोष द्विवेदी ने सुधीर त्रिपाठी पर साजिश रचने, फर्जी शिकायतों के जरिए जांच के नाम पर गांव में बलवा कराने और प्रधानी पर कब्जा करने का आरोप लगाया है।
फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप की जांच कर रही है। सत्ता के करीबी माने जाने वाले दोनों गुटों के आमने-सामने होने के कारण पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मीडिया के सामने खुलकर बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं।






