फतेहपुर, 27 अक्टूबर। ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान फतेहपुर के तत्वावधान में ग्राम सरकी स्थित श्री भजनानंद सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विवाह मुक्त अभियान के अंतर्गत मिशन शक्ति फेज 6.0 के तहत बाल विवाह और बाल श्रम के विरुद्ध जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए इसके उन्मूलन के लिए जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाल कल्याण समिति फतेहपुर के अध्यक्ष एवं मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद साहू ने कहा कि बाल विवाह एक अपराध है। इसके कारण बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है और उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कम उम्र में गर्भधारण से माता और शिशु दोनों के जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह कराने, उसमें शामिल होने और सहयोग करने वाले व्यक्तियों को कानून के तहत दो वर्ष तक की जेल और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
विशिष्ट अतिथि बाल कल्याण समिति के सदस्य एवं मजिस्ट्रेट रामकृष्ण पांडेय ने विद्यार्थियों को बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयों के दुष्परिणामों के प्रति सचेत किया। उन्होंने इन कुरीतियों के उन्मूलन के लिए जागरूकता बढ़ाने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने पर जोर दिया।
चाइल्ड लाइन प्रभारी नीरू पाठक ने बच्चों की सहायता और सुरक्षा के लिए विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी बच्चे को सहायता की आवश्यकता होने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस सेवा 112, साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930, एंबुलेंस सेवा 108, स्वास्थ्य सेवा 102 और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर संपर्क किया जा सकता है।
कार्यक्रम में चाइल्ड राइट्स एसोसिएट अमन तिवारी, थाना गाजीपुर की मिशन शक्ति प्रभारी उपनिरीक्षक ज्योति कौशिक, थाना एएचटीयू के उपनिरीक्षक हरि नारायण शुक्ला, कांस्टेबल आलोक यादव, विद्यालय प्रबंधक सत्येंद्र कुमार, प्रधानाचार्य छाया यादव सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ और ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान के सदस्य सुधांशु द्विवेदी एवं आशुतोष मोदनवाल उर्फ सोनू मोदनवाल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान के जिला समन्वयक पुष्पेंद्र कुमार ने किया। समापन के दौरान विद्यालय प्रबंधक सत्येंद्र कुमार ने कहा कि बच्चों को जागरूक करने और उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए विद्यालय में समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।






