फतेहपुर। जनपद में ओवरलोडिंग के खिलाफ जिला प्रशासन की सख्ती के दावों के बीच वायरल हुए जीपीएस वीडियो ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा ओवरलोड वाहनों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं। टास्क फोर्स का गठन, बैरियर प्वाइंट की स्थापना और नियमित चेकिंग अभियान चलाने के दावे भी किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद रामनगर कौहन यमुना पुल, असोथर, प्रताप नगर झाल और आसपास के मार्गों से ओवरलोड ट्रकों और डंपरों का आवागमन जारी रहने की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है।
मामला तब सुर्खियों में आया जब स्थानीय लोगों ने जीपीएस आधारित वीडियो और फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। वायरल वीडियो में मोरम और गिट्टी से लदे ट्रक और डंपर मुख्य मार्गों से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासन द्वारा किए जा रहे दावों की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जब शासन और जिला स्तर पर ओवरलोडिंग के खिलाफ अभियान चलाने की बात कही जा रही है, तो फिर ऐसे वाहन सड़कों पर खुलेआम कैसे दौड़ रहे हैं। लोगों ने खनिज विभाग और परिवहन विभाग (आरटीओ) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदार विभागों की सक्रियता के बावजूद यदि ओवरलोड वाहन लगातार निकल रहे हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
वहीं क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कुछ लोग वाहनों को चेकिंग प्वाइंट, अधिकारियों की लोकेशन और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी उपलब्ध कराते हैं, जिससे वे कार्रवाई से बचकर निकल जाते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस तरह की चर्चाएं लगातार हो रही हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वायरल जीपीएस वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोकेशनों की तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी हो रही है तो जिम्मेदार लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल वायरल वीडियो के बाद जिला प्रशासन, पुलिस, खनिज विभाग और आरटीओ विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और ओवरलोडिंग पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।






