फतेहपुर। जिले में झोलाछाप एवं कथित अवैध चिकित्सकों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। शहर के चर्चित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर कार्रवाई के बाद जोनिहा के एक चर्चित “बंगाली डॉक्टर” की क्लिनिक भी जांच के दायरे में आई थी। कार्रवाई की आहट मिलते ही क्लिनिक बंद हो गई, लेकिन स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक कुछ ही दिनों में फिर से संचालन शुरू हो गया।
वहीं नाऊवाबाग क्षेत्र में एक स्कूल के निकट बिना पंजीयन अस्पताल संचालन की चर्चाएं लंबे समय से हैं। आरोप है कि संचालक खुद को डॉक्टर बताकर अस्पताल चला रहा है, लेकिन जांच टीम अब तक वहां नहीं पहुंची।
असोथर कस्बे में कई निजी अस्पतालों में बड़े ऑपरेशन किए जाने की चर्चा है। यमुना पट्टी क्षेत्र में भी बाहरी जनपद के कुछ चिकित्सकों पर इलाज के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूलने के आरोप लगते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई शायद ही कभी दिखाई देती है।
हाल ही में जिलाधिकारी ने बिना पंजीयन एवं मानकविहीन अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कई कथित अवैध अस्पताल और क्लिनिक अब भी संचालित होने की चर्चाएं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर कार्रवाई से पहले किसे खबर लग जाती है और किनके संरक्षण में यह खेल जारी है?






