




फतेहपुर। फतेहपुर के शांति नगर स्थित एक निजी अस्पताल में जुआ और शराब पार्टी का वायरल वीडियो सामने आने के बाद शपथ समाचार की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। खबर प्रसारित होते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और तत्काल जांच टीम गठित कर मौके पर भेजी गई। जांच में जो सामने आया, उसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि वायरल वीडियो न्यू राधे अस्पताल का ही है। टीम के साथ पहुंचे प्रभारी डॉक्टर पी.के. सिंह ने जब अस्पताल का निरीक्षण किया तो कई चौंकाने वाली खामियां उजागर हुईं। अस्पताल परिसर के बाहर गंदगी फैली मिली, वहीं ऑपरेशन थिएटर (OT) में तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कोई भी डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं मिला। जिस फ्लोर का वीडियो वायरल हुआ था, उसी पर अस्पताल संचालक सोता हुआ पाया गया। हालांकि उसने पहले इस फ्लोर को अपने नियंत्रण में न होने की बात कहकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की, लेकिन बयान में विरोधाभास और मौके की स्थिति ने उसकी बातों पर सवाल खड़े कर दिए।
जांच टीम ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल को नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही यह भी सामने आया है कि अस्पताल का पंजीकरण 30 तारीख के बाद समाप्त होने वाला है। वेस्टेज मैनेजमेंट की भी कोई व्यवस्था नहीं पाई गई, जो कि स्वास्थ्य नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में अब पुलिस भी सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। फायर NOC में भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी संज्ञान लिया है और उच्चाधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देते हुए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम तक शिकायत भेजी गई है। वहीं CMO ने भी साफ कहा है कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि हाल ही में इसी अस्पताल के संचालक द्वारा CMO को गुलदस्ता भेंट करने की तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिससे विभागीय नजदीकियों की चर्चा तेज हो गई थी। अब इस पूरे मामले के खुलासे के बाद निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
शपथ समाचार की पड़ताल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जिम्मेदार पत्रकारिता समाज के लिए कितना जरूरी है। इस खुलासे ने न सिर्फ एक अस्पताल की सच्चाई उजागर की, बल्कि पूरे सिस्टम को आईना दिखाने का काम किया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करता है।






