फतेहपुर शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 432वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता के.पी. सिंह कछवाह ने की, जबकि संचालन शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष के.पी. सिंह कछवाह ने वाणी वंदना के साथ किया। उन्होंने अपने भावों को इन पंक्तियों में प्रस्तुत किया—
“सरस्वती मां, आइए, होकर हंस सवार,
सजा आरती थाल है, पूजा को तैयार।”
इसके बाद उन्होंने गुरु सम्मान पर जोर देते हुए कहा—
“कभी भूलकर हो नहीं, गुरुओं का अपमान,
वरना फिर पछताओगे, मिट जाएगी शान।”
काव्य गोष्ठी में डॉ. सत्य नारायण मिश्र ने छंद के माध्यम से आत्मज्ञान का संदेश देते हुए कहा—
“मानुष अति अज्ञानवश, आत्मस्वरूप न जान,
है चहुं दिस ढूंढ़त फिरत, हृदय मांहि भगवान।”
राम अवतार गुप्ता ने अपने मुक्तक में भक्ति भाव प्रस्तुत करते हुए कहा—
“भक्तों के कल्याण हित, लीन्ह राम अवतार,
राम नाम निशि-दिन जपो, कहत ‘राम अवतार’।”
प्रदीप कुमार गौड़ ने सामाजिक सरोकारों को उजागर करते हुए कहा—
“रहे न वंचित-शोषित कोई, पूरे हों सबके अरमान,
रचा है भारत- संविधान को, भीमराव पर हमें गुमान।”
डॉ. शिव सागर साहू ने अपने काव्य पाठ में लोकभाषा की सुगंध बिखेरते हुए कहा—
“सेतुवाहिन मा सब जनें, सेतुवा घ्वारौ, खाव,
तन-मन का चंगा करौ, राम-नाम गुन गाव।”
कार्यक्रम के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने मुक्तक के माध्यम से प्रेरणादायक संदेश दिया—
“धर्म के रथ पर बैठे हुए, कर्म के पथ पर बढ़ते रहो,
विश्वमंगल का ले उद्देश्य, ऋचाएं नूतन गढ़ते रहो।”
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि पुजारी विजय कुमार शुक्ल ने सभी कवियों और उपस्थित जनों को आशीर्वाद प्रदान किया। अंत में आयोजक द्वारा सभी के प्रति आभार व्यक्त किया गया।






