फतेहपुर। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 438वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता के पी सिंह कछवाह ने की, जबकि संचालन शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना से किया। उन्होंने कहा—
“सरस्वती मां, प्रार्थना, करो कुमति का नाश।
अंत:करण पवित्र कर, करो हृदय में वास।।”
इसके बाद उन्होंने नौतपा की भीषण गर्मी पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“भीषण तपता नौतपा, सूरज उगले आग।
पशु-पक्षी को छांव दें, हो उनसे अनुराग।।”
डा. सत्य नारायण मिश्र ने विरह वेदना पर आधारित छंद प्रस्तुत किया—
“मैं अबला घर में पड़ी, तन दाझत दिन-रैन।
बिरहबिथा ब्याकुल किये, तुम बिन मिलै न चैन।।”
नवीन शुक्ल ‘नवीन’ ने अपने मुक्तक में वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर कटाक्ष करते हुए कहा—
“दर्पण-दर्पण खोज रहे हैं, चेहरा अब सच्चाई का।
कद के बौने ढूंढ रहे हैं, विम्ब बड़ा परछाई का।।
चेहरों के बाजार सजे सब, व्यवसायी ईमानों के,
अजब दौर है, बहरों के संग अंधों की अगुवाई का।।”
डॉ. विजय शंकर मिश्र ने प्रेरणादायी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“छंद पे छंद बनाता चल तू, जीवन-गीत सजाता चल तू।
विभावरी से भीत न होकर, जगमग दीप जलाता चल तू।।”
प्रदीप कुमार गौड़ ने मां गंगा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा—
“वेद-पुराण-शास्त्र सब कहते, पापनाशिनी है गंगा।
एक बार के दर्शन से ही, मन हो जाता है चंगा।।”
डॉ. शिव सागर साहू ने आर्थिक स्थिति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा—
“गैर जरूरी खर्च में, करें कटौती आप।
आर्थिक संकट देश का, मिट जाएगा आप।।”
राम अवतार गुप्ता ने राष्ट्रीय भाई दिवस पर संदेश देते हुए कहा—
“राष्ट्रीय भाई दिवस, का संदेश महान।
मिलजुल कर भाई रहें, घर हो स्वर्ग समान।।”
कार्यक्रम के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने भी मुक्तक के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किए—
“गंगा, गीता, गौ, गायत्री, सब पर ही संकट है।
आर्य संस्कृति आज विपद में, पड़ा कपट का पट है।।”
कार्यक्रम के अंत में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल ने सभी साहित्यकारों को आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजक द्वारा सभी उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।






