फतेहपुर। जनपद के हसनापुर सानी गांव में कथित नकली खोया कारोबार और सरकारी जमीनों पर कब्जे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से बड़े पैमाने पर नकली खोया तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि केमिकल और मिलावटी सामग्री से तैयार किया जा रहा यह मावा लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।
ग्रामीणों का कहना है कि नकली खोया कारोबार से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों ने गांव के बाहर दर्जनों बीघा सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है। आरोप है कि एक चर्चित खोया कारोबारी ने सरकारी भूमि पर ही अपनी बड़ी इमारत खड़ी कर ली है, जबकि उसके साथ कई अन्य लोगों ने भी सरकारी जमीनों पर कब्जा जमा रखा है।
हाल ही में हाजीपुर गंग गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची राजस्व टीम की कार्रवाई के बाद लोगों को उम्मीद थी कि हसनापुर सानी में भी सरकारी जमीनों पर बने अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई होगी। लेकिन यहां कोई बड़ी कार्रवाई न होने से ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण के चलते सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। यही वजह है कि अब गांव और आसपास के क्षेत्रों में यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर हसनापुर सानी में प्रशासन का बुलडोजर कब चलेगा और सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कब कराया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई तो सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जों का दायरा और बढ़ सकता है। वहीं नकली खोया कारोबार के आरोपों की भी गहन जांच की मांग उठ रही है। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।






