फतेहपुर। मलवां थाना क्षेत्र के हसनापुर सानी गांव में लंबे समय से कथित रूप से नकली खोया बनाने का संगठित कारोबार संचालित होने की चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि गांव में रात के अंधेरे में केमिकल, सिंथेटिक पाउडर और अन्य मिलावटी पदार्थों से भारी मात्रा में नकली खोया तैयार किया जाता है, जिसकी सप्लाई शहर की मिठाई दुकानों, नमकीन प्रतिष्ठानों और रेस्टोरेंटों तक की जाती है। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क से आधा दर्जन से अधिक लोग जुड़े हुए हैं और इसका कारोबार कई जिलों तक फैला हुआ है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार नकली खोया तैयार करने के साथ-साथ नकली पनीर का भी बड़ा कारोबार संचालित किया जा रहा है। हाल ही में इस मामले की खबरें सामने आने के बाद संबंधित विभाग ने संज्ञान लेते हुए दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन पूरे नेटवर्क का कथित सरगना अब भी विभागीय पकड़ से दूर बताया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई बड़ी और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभागीय अधिकारियों और कारोबारियों के बीच सांठगांठ की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। सूत्र बताते हैं कि पूर्व में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध खोया बरामद हुआ था, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
मिलावटी खोया और उससे बनने वाली खाद्य सामग्री लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार केमिकल युक्त मावा पेट, लीवर और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच यह भी चर्चा है कि इस पूरे कारोबार का कथित सरगना गांव में ग्राम समाज और खलिहान की कई एकड़ भूमि पर कब्जा किए हुए है। हालांकि प्रभावशाली होने के कारण राजस्व विभाग भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। ग्रामीण खुलकर विरोध करने से बच रहे हैं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील बना हुआ है।
फिलहाल हसनापुर सानी में चल रहे कथित नकली खोया और नकली पनीर कारोबार को लेकर जिले भर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।






