फतेहपुर: जिले में जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय से जुड़ा मामला अब बड़ा सियासी और प्रशासनिक तूफान बनता जा रहा है। कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक विनोद कुमार श्रीवास्तव द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने के बाद सामने आए प्रार्थना पत्र और सुसाइड नोट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में उनको पत्नी पूनम श्रीवास्तव ने कोतवाली में BJP के पूर्व जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल व DIOS के खिलाफ FIR दर्ज करने की तहरीर दी है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त प्रार्थना पत्र के अनुसार, लिपिक की पत्नी पूनम श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि उनके पति को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। इसमें सीधे तौर पर जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल का नाम सामने आया है।


आरोप है कि:
पति पर गलत कार्यों का दबाव बनाया जाता था मना करने पर मानसिक उत्पीड़न किया जाता था पूर्व जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल द्वारा “राज्य महिला आयोग में पद दिलाने” के नाम पर 25 लाख रुपये लिए गए
पैसा लेने के बावजूद न तो कोई पद मिला, न ही रकम वापस की गई
कर्ज, दबाव और टूटा हौसला
परिजनों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में लिपिक ने ब्याज पर भारी रकम उधार ली थी। लगातार दबाव और आर्थिक संकट के चलते उनकी हालत बिगड़ती गई। आखिरकार 23 मार्च 2026 को उन्होंने कार्यालय में ही जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास कर लिया। सहकर्मियों की सूचना पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
सुसाइड नोट ने बढ़ाई सियासत
घटना के बाद मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसे प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न किया गया है। इसमें भी उन्हीं आरोपों को दोहराया गया है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
पुलिस क्या कह रही है?
कोतवाली प्रभारी हेमन्त मिश्रा ने बताया: “प्रकरण की जांच की जा रही है, जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
अभी तक FIR नहीं, कायस्थ समाज में नाराजगी
घटना के 36 घण्टे बाद भी मुकदमा दर्ज न होने से कायस्थ समाज में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि:इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों?
क्या प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है?
❗ अब आगे क्या?
यह मामला अब सिर्फ एक आत्महत्या प्रयास नहीं, बल्कि:
भ्रष्टाचार सत्ता के दुरुपयोग
और प्रशासनिक दबाव जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर कर रहा है। अगर जांच निष्पक्ष होती है, तो कई बड़े नामों पर कार्रवाई हो सकती है।
लेकिन अगर देरी जारी रही, तो यह मामला और बड़ा आंदोलन बन सकता है।
सवाल वही—क्या मिलेगा न्याय या दब जाएगा मामला?






