नरसिंह मौर्य, असोथर (फतेहपुर)
जनपद के असोथर क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने किसानों को गहरी चोट पहुंचाई है। मार्च के तीसरे सप्ताह से अचानक बदले मौसम के मिजाज ने किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ा दी हैं, जिसका असर अप्रैल माह में भी जारी है। बेमौसम बारिश, तेज आंधी और बादलों की लगातार आवाजाही ने खेती-किसानी को सबसे अधिक प्रभावित किया है।
इस समय जब किसान गेहूं, लाही, सरसों और चना जैसी रबी फसलों की कटाई और मड़ाई में जुटे थे, तभी अचानक आई बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में भारी तबाही मचा दी। कई जगहों पर कटी हुई फसलें खेतों में ही भीग गईं, जिससे दानों के अंकुरित होने और काला पड़ने का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही फसल की गुणवत्ता पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
असोथर कस्बे सहित पूरे ब्लॉक क्षेत्र में बीते तीन दिनों से हर शाम मौसम खराब हो रहा है। आंधी-तूफान के साथ हो रही बारिश के कारण खड़ी गेहूं की फसल खेतों में गिर गई है, जिससे कटाई में अतिरिक्त समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि पूरे ब्लॉक में अब तक केवल करीब 10 प्रतिशत गेहूं की कटाई हो पाई है, जबकि लगभग 90 प्रतिशत फसल अभी भी खेतों में खड़ी है।
किसानों का कहना है कि मौसम की इस अनिश्चितता ने उनकी पूरी योजना को चौपट कर दिया है। पहले से ही मंडियों में फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे किसान खुले बाजार में औने-पौने दामों पर अपनी उपज बेचने को मजबूर होते हैं। अब बारिश और आंधी से हुए नुकसान ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है।
क्षेत्र के किसान बाबू सिंह यादव, हरेंद्र निषाद, रामसुमेर मौर्य, दिलीप तिवारी, अनिरुद्ध मौर्य, सुशील और रामेंद्र मौर्य सहित अन्य किसानों ने बताया कि खेतों में खड़ी और कटी दोनों तरह की फसलें प्रभावित हुई हैं। भारी लागत और मेहनत के बावजूद नुकसान की आशंका से किसानों के चेहरों पर चिंता साफ झलक रही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित फसलों का जल्द से जल्द सर्वे कराया जाए और नुकसान का सही आकलन कर आपदा राहत के तहत उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि इस विपरीत मौसम की मार झेल रहे अन्नदाताओं को कुछ राहत मिल सके।






