फतेहपुर। जिले में स्वास्थ्य विभाग भले ही लगातार निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमों पर कार्रवाई के दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। शहर से लेकर कस्बाई इलाकों तक कई निजी अस्पताल ऐसे संचालित हो रहे हैं, जहां न तो फायर सेफ्टी के मानक पूरे हैं और न ही पंजीयन की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी की गई है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
जानकारी के मुताबिक जिले में आधा दर्जन से अधिक ऐसे नर्सिंग होम संचालित हैं, जहां मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। कई अस्पतालों में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता बनाया गया है। ऐसे में अगर गर्मी के मौसम में शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी कोई बड़ी घटना हो जाए तो मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है। फायर ब्रिगेड के नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
सबसे चौंकाने वाला मामला शहर के नउवा बाग इलाके से सामने आया है, जहां हथगाम क्षेत्र का एक व्यक्ति खुद को डॉक्टर बताकर अस्पताल संचालित कर रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति के पास डॉक्टर होने का वैध प्रमाण तक नहीं है, इसके बावजूद अस्पताल में बाकायदा ओपीडी चलाई जा रही है। इतना ही नहीं, वहां ओटी भी संचालित है और समय-समय पर ऑपरेशन किए जाने की भी चर्चा है।
सूत्रों की मानें तो अस्पताल का पंजीयन भी संदिग्ध है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर बिना मानक पूरे किए ऐसे अस्पतालों को संरक्षण कौन दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर अब आम लोगों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मामले की जांच कराकर अवैध रूप से संचालित अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले लोगों की जान बचाई जा सके।






