फतेहपुर/खागा। नगर पंचायत खागा में करीब 7 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के टेंडरों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि निर्धारित तिथि बीत जाने के बाद भी ई-टेंडर नहीं खोले गए और सत्ता संरक्षण में चहेते ठेकेदारों को गुपचुप तरीके से काम बांटे जा रहे हैं। मामले को लेकर नगर पंचायत प्रशासन पर भ्रष्टाचार, नियमों की अनदेखी और उच्चाधिकारियों को गुमराह करने जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक नगर पंचायत खागा द्वारा 13 अप्रैल 2026 को कुल 41 विकास कार्यों के लिए लगभग 7 करोड़ 10 लाख रुपये के टेंडर जारी किए गए थे। ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए निविदाकर्ताओं को 17 अप्रैल से 7 मई तक आवेदन करना था, जबकि टेंडर 8 मई को खोले जाने निर्धारित थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि तय तारीख गुजर जाने के बाद भी अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
करोड़ों के इन मदों के लिए जारी हुए थे टेंडर
मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना के 12 कार्य – ₹2.55 करोड़ से अधिक
15वां वित्त टाइड ग्रांट के 3 कार्य – ₹65 लाख से अधिक
15वां वित्त अनटाइड/अन्य मद के 9 कार्य – ₹1.25 करोड़ से अधिक
राज्य वित्त के 17 कार्य – ₹2.63 करोड़ से अधिक
कुल मिलाकर लगभग ₹7,10,03,478 के कार्यों की निविदाएं आमंत्रित की गई थीं।
“एडवांस कमीशन” लेकर बांटे जा रहे काम?
नगर पंचायत से जुड़े सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं में दावा किया जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया को जानबूझकर रोका गया है और अंदरखाने “एडवांस कमीशन” लेकर चुनिंदा ठेकेदारों को अनुबंध दिए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय तरीके से संचालित किया जा रहा है ताकि किसी तरह का विरोध या सवाल खड़ा न हो सके।
EO का बयान भी सवालों के घेरे में
मामले में जब अधिशासी अधिकारी देवहुती पांडे से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह इस समय जनगणना कार्य में व्यस्त हैं और टेंडर की तकनीकी प्रक्रिया अवर अभियंता देखते हैं। उनका कहना है कि “टेंडर बिड अवर अभियंता खोलते हैं।”
हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब पूरी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के हस्ताक्षरों से जारी हुई है, तो जिम्मेदारी से पल्ला कैसे झाड़ा जा सकता है।
शासन तक पहुंचेगी शिकायत
नगर पंचायत में चल रहे इस कथित खेल को लेकर अब शिकायत शासन स्तर तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो करोड़ों रुपये के टेंडरों में बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।
जनता में भारी नाराजगी
नगर पंचायत खागा में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों से आम जनता में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि ई-टेंडर जैसी ऑनलाइन प्रक्रिया में भी मनमानी और भ्रष्टाचार होगा, तो फिर पारदर्शिता का दावा सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।






