लेखक : शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी
हिंदू पंचांग केअनुसार पुरुषोत्तम मास,जिसे अधिमास अथवा मलमास भी कहा जाता है, एक विशेष अतिरिक्त मास है। यह चंद्र मास और सूर्य मास के मध्य उत्पन्न होने वाले अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है। लगभग प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार इसका आगमन होता है और यह हिंदू धर्म में आध्यात्मिक उन्नति एवं ईश्वर-भक्ति के लिए समर्पित माना गया है।
वर्ष 2026 में पुरुषोत्तम मास का प्रारंभ 17 मई 2026 (ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा) से होकर 15 जून 2026 (ज्येष्ठ अमावस्या) तक रहेगा। इस अवधि में सामान्यतः कोई प्रमुख पर्व-त्योहार नहीं पड़ते हैं।
शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में विवाह, सगाई, यज्ञोपवीत, मुंडन, गृह-प्रवेश, नवीन भवन या वाहन क्रय जैसे मांगलिक एवं शुभ कार्यों का आरंभ नहीं किया जाता। यह संपूर्ण मास भगवान की आराधना, जप, तप, व्रत, उपवास, दान-पुण्य तथा आध्यात्मिक साधनाओं के लिए निर्धारित माना गया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक समय इस मास का समाज में विशेष सम्मान नहीं था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने इसे अपना नाम प्रदान करते हुए “पुरुषोत्तम मास” की संज्ञा दी और इसे सर्वोत्तम आध्यात्मिक साधना का काल घोषित किया। इसका उद्देश्य यह है कि मनुष्य कुछ समय सांसारिक व्यस्तताओं से ऊपर उठकर आत्मकल्याण, धर्मचिंतन और ईश्वर-स्मरण में व्यतीत करे।
इसी कारण इस मास में तीर्थस्थलों तथा धार्मिक स्थलों पर श्रीमद्भागवत कथा, रामकथा, सत्संग, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु इस अवधि में अधिकाधिक पुण्य अर्जित करने तथा आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास करते हैं।
दोहा
अधिक मास, मलमास ही, श्री पुरुषोत्तम मास।
हो पवित्र पूजन-भजन, करिए व्रत-उपवास।।
उपशीर्षक सुझाव:
“सांसारिकता से आध्यात्मिकता की ओर ले जाने वाला दिव्य मास”
“भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित पुण्य एवं साधना का विशेष काल”
“भक्ति, तप और आत्मकल्याण का अद्भुत पर्व”
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